बॉलीवुड फिल्म गुस्ताख़ इश्क़ में बजेगा बुंदेलखंड के शायर अशोक मिजाज का जादू

बॉलीवुड फिल्म गुस्ताख़ इश्क़ में बजेगा बुंदेलखंड के शायर अशोक मिजाज का जादू


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Sagar News: सागर के शायर अशोक मिजाज ‘बद्र’ के मशहूर शेर फिल्म “गुस्ताख इश्क” में पढ़े जाएंगे. इनको बॉलीवुड के प्रसिद्ध जाने-माने अभिनेता नसरुद्दीन शाह कहते हुए सुनाई देंगे. एक दिन पहले ही रिलीज हुए 2 मिनट 33 सेकंड की ट्रेलर में दो शेर इन्हीं के हैं

बॉलीवुड फिल्म जगत की बहुप्रतीक्षित फिल्म “गुस्ताख़ इश्क” में इस बार बुंदेलखंड के प्रसिद्ध गज़लकार अशोक मिज़ाज़ की शायरी का जादू दर्शकों पर चलेगा. अशोक मिज़ाज़ साहब के लिखे आठ शेर फ़िल्म के डायलॉग्स के बीच पिरोए गए हैं, जिन्हें महान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी आवाज़ देंगे. यह सागर बुंदेलखंड के साहित्यिक जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इसको लेकर अशोक मिजाज का कहना है कि यह मुझे अच्छा लगा. किसी गजल या शायरी में शेर आने से अच्छा है कि वह फिल्म में आ रहा है.

अभी तक बॉलीवुड जगत में बुंदेलखंड के अभिनेता एक्टिंग से फिल्मों में गर्दा उड़ा रहे थे. लेकिन अब एक और नई उपलब्धि इसमें जुड़ गई है. सागर के शायर अशोक मिजाज ‘बद्र’ के मशहूर शेर फिल्म “गुस्ताख इश्क” में पढ़े जाएंगे. इनको बॉलीवुड के प्रसिद्ध जाने-माने अभिनेता नसरुद्दीन शाह कहते हुए सुनाई देंगे. एक दिन पहले ही रिलीज हुए 2 मिनट 33 सेकंड की ट्रेलर में दो शेर इन्हीं के हैं यहां तक की ट्रेलर की शुरुआत भी मिजाज साहब के शेर “मेरा लहजा कैक्टस सा खुरदुरा, तेरी बाते रातरानी की तरह” से हुई है. तो नसीरुद्दीन शाह की आवाज़ में, गम कोई देना है तो दे दे मुझे, दिल में रख लूंगा निशानी की तरह…. यह फिल्म 28 नवंबर को रिलीज हो रही है. फ़िल्म में विजय वर्मा, फातिमा सना शेख, नसीरुद्दीन शाह और शारिब हाशमी मुख्य भूमिकाओं में हैं.

पिछले 40 सालों से हिंदी और उर्दू में शायरी लिख रहे
अशोक मिजाज बद्र पिछले 40 सालों से हिंदी और उर्दू में शायरी लिख रहे हैं. उन्होंने अपनी बैंक की नौकरी करने के साथ-साथ अदब की दुनिया में भी बड़ा नाम कमाया है. इन्होंने उस्ताद बसीर बद्र साहब से शायरी करना सीखा है. यह अब तक 12 किताबें लिख चुके हैं. इन्हें हिंदी और उर्दू के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं तो वही देश की अलग-अलग पांच यूनिवर्सिटियों के द्वारा मिजाज साहब की गजलों पर शोध कार्य किए गए हैं. इतना ही नहीं पिछले 40 सालों में बड़े-बड़े 100 से अधिक कव्वाल उनकी गजलों को कव्वाली के रूप में फार्मा चुके हैं.कई सिंगर भी इन्हें गा चुके हैं हाल ही में अल्ताफ राजा ने भी उनकी गजल को अलग से एक एल्बम में गाया था.

गजलों पर पांच विश्वविद्यालय से पीएचडी
विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में शोधार्थी जयहिंद सिंह वर्मा द्वारा ‘अशोक मिज़ाज की ग़ज़लें संवेदना और शिल्प’ विषय पर पीएच.डी. अवार्ड 2024. जम्मू कश्मीर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में आरती देवी द्वारा इक्कीसवीं सदी की ग़ज़लें में ग़ज़ल संग्रह ‘किसी किसी पे ग़ज़ल मेहरबान होती है’ . मौलाना आज़ाद उर्दू विश्वविद्यालय हैदराबाद में बुंदेलखंड के उर्दू शायरों में, इम्तियाज़ मिस्बाही द्वारा शोध. औरंगाबाद विश्वविद्यालय में वागीनाथ वाखले के ‘समकालीन हिंदी गुज़ल स्वरूप एवं प्रयोग’ पर शोध. साइन्स कालेज पटना, (बिहार) के शोधार्थी, विषय हिंदी और भोजपुरी ग़ज़लों का तुलनात्मक अध्ययन में शामिल.

अशोक मिजाज बद्र के प्रमुख पुरस्कार 
सागर के शायर अशोक मिजाज बद्र को वैसे तो कई पुरस्कार मिले हैं. लेकिन कुछ प्रमुख और मशहूर पुरस्कार की बात करें तो उनमें मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के शिफा ग्वालियरी और मोहम्मद अली ताज सूबाई, निश्तर खानकाही स्मृति ग़ज़ल अवार्ड बिजनौर उत्तर प्रदेश से, परवाना स्मृति, स्वर्ण पत्रक सम्मान, खगड़िया (बिहार) से, संकल्प साहित्य शिरोमणि पुरुस्कार, राउरकेला (उड़ीसा), साहित्य सृजन सम्मान, नागपुर (महाराष्ट्र) शामिल हैं.

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