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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का मशहूर सफेद पत्थर उद्योग अब लगभग खत्म होने की कगार पर है. कभी विदेशों तक सप्लाई होने वाला शिवपुरी स्टोन आज खदानों के बंद होने से पहचान खो रहा है. जिले की कई प्रमुख खदानें अब सिर्फ कागजों में सक्रिय हैं. जमीन पर उनका संचालन पूरी तरह रुक चुका है. स्थानीय मजदूर बताते हैं कि जब खदानें चलती थीं, तब हजारों लोगों को रोजगार मिलता था. लेकिन अब लोग रोज मजदूरी की तलाश में भटक रहे हैं.
आशीष पांडेय
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का सफेद पत्थर उद्योग अब बड़े संकट में है. कभी यह उद्योग जिले की सबसे मजबूत पहचान था. शिवपुरी स्टोन देश और विदेश के बाजारों में सप्लाई किया जाता था. स्थानीय अर्थव्यवस्था भी इसी उद्योग पर टिकी थी. लेकिन अब वही खदानें बंद पड़ी हैं और उद्योग लगभग खत्म होने की स्थिति में है. जिले की प्रमुख सफेद और लाल पत्थर की खदानें अब जमीन पर सक्रिय नहीं हैं. कागजों में इनके संचालन के रिकॉर्ड मिल जाते हैं. लेकिन खदानों में मजदूरों की आवाज और मशीनों की गूंज पूरी तरह गायब हो चुकी है. कई खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं. इनमें सुरक्षा, पर्यावरण मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की लंबी उलझनें सामने आई हैं.
स्थानीय मजदूर बताते हैं कि खदानें चलती थीं, तब काम की कमी नहीं थी. मजदूरों को रोज मजदूरी मिलती थी. इससे हजारों परिवारों की आजीविका चलती थी. लेकिन खदानों के बंद होने के बाद हालात बदल गए. मजदूर सुबह-सुबह काम की तलाश में निकलते हैं. कई बार पूरा दिन बिना काम खत्म होता है. स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर दिख रहा है.
मंजूरी संबंधी विवादों और खनन नियमों के कड़े प्रावधानों का बुरा असर
शिवपुरी स्टोन उद्योग जिले की पहचान का हिस्सा था. इस पत्थर की खास सफेद चमक और मजबूती की वजह से इसकी मांग विदेशों तक रहती थी. निर्माण क्षेत्र में इसका व्यापक इस्तेमाल होता था. लेकिन मंजूरी संबंधी विवादों और खनन नियमों के कड़े प्रावधानों ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी. खदानें बंद होने के बाद कारोबारियों ने काम रोक दिया. स्थानीय परिवहन, मशीन मालिक और दुकानदार भी इससे प्रभावित हुए.
प्रशासन और उद्योग के बीच समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खदानों को फिर से सुचारु रूप से संचालित किया जाए, तो रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं. प्रशासन और उद्योग के बीच समाधान की जरूरत है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह उद्योग फिर से शुरू हो जाए, तो शिवपुरी की पुरानी पहचान भी वापस आ सकती है. फिलहाल खदानों पर सन्नाटा है. कभी उद्योग की आवाज से भरे रहने वाले ये क्षेत्र अब खाली पड़े हैं. स्थानीय लोग खदानों के भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो शिवपुरी का पारंपरिक सफेद पत्थर उद्योग इतिहास बन जाएगा.
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें