मध्यप्रदेश में पर्यटन हेली सेवा शुरू होते ही विवादों में आ गई है। इस हेलिकॉप्टर सेवा में एमपी के चार प्रमुख टाइगर रिज़र्व- सतपुड़ा, कान्हा, पेंच और बांधवगढ़ को लेकर अब कानूनी आपत्ति दर्ज कराई गई है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्
.
अब जानिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है सुप्रीम कोर्ट ने ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को ‘शांति क्षेत्र’ घोषित करने और कम ऊंचाई उड़ानों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने टीएन गोदावर्मन बनाम भारत सरकार के मामले में पारित किए गए आदेश में कहा है कि टाइगर रिजर्व और उनके ईको-सेंसिटिव जोन ESZ को ‘साइलेंस जोन’ (शांति क्षेत्र) घोषित किया जाए, इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की उच्च ध्वनि वाली गतिविधि प्रतिबंधित होगी।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को लेकर SC ने दिया है आदेश ड्रोन, विमान और हेलिकॉप्टर जैसी उड़ानें ESZ की अधिकतम ऊंचाई से 1000 फीट से नीचे नहीं उड़ाई जा सकतीं, और वन्यजीव क्षेत्र के ऊपर किसी भी “लो-हाइट फ्लाइंग” को सख्त रूप से मना किया गया है। ये सभी निर्देश कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में हुए पर्यावरणीय क्षति का संज्ञान लेते हुए दिए गए थे।
मध्यप्रदेश में 20 नवंबर से हेली सेवा शुरू हुई है।
एमपी में टाइगर कोर एरियर के करीब बने हैलीपैड
एमपी में पर्यटन हेली सेवा के लिए प्रस्तावित हेलीपैड टाइगर कोर एरिया से मात्र 200–300 मीटर दूरी पर बनाए गए हैं। जो सुप्रीम कोर्ट की ‘शांति क्षेत्र’ की शर्तों और 1000 फीट न्यूनतम उड़ान ऊंचाई नियम का सीधा उल्लंघन है।
सीएम को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इतनी निकटता पर हेलिकॉप्टर संचालन बाघों, शावकों और संवेदनशील वन्यजीवों को हाई साउंड (उच्च ध्वनि) और बाइव्रेशन (कंपन) से गंभीर खतरा पहुंचाता है।

एमपी में पर्यटन हेली सेवा के लिए प्रस्तावित हेलीपैड टाइगर कोर एरिया से मात्र 200–300 मीटर दूरी पर बनाए गए हैं।
हेलिकॉप्टर भी एयरक्राफ्ट की श्रेणी में आते हैं
सीएम को लिखे पत्र में ये कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार- हेलिकॉप्टर ‘एयरक्राफ्ट’ की श्रेणी में आते हैं। इसलिए उन पर भी विमान जैसी ही उड़ान ऊंचाई और शोर नियंत्रण के नियम लागू होंगे। इसके कारण ईको-सेंसिटिव जोन ESZ की सीमा के ऊपर 1000 फीट से नीचे उड़ान भरना प्रतिबंधित श्रेणी में आता है।
CM को लिखे गए पत्र में मांग- तुरंत रोकें, हेली सेवा
मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ESZ में हेलिकॉप्टर सेवा चलाना सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर के आदेश का सीधा उल्लंघन है, टाइगर रिज़र्व में ध्वनि प्रदूषण बढ़ने से वन्यजीवों के व्यवहार, प्रजनन और सुरक्षा पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए सभी प्रस्तावित हेलीपैड को ESZ और बफर क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाए और उड़ान संचालन न्यूनतम 1000 फीट से नीचे न किया जाए।
जानिए हेलिकॉप्टर का पूरा शेड्यूल क्या है? कब-कहां से हेलिकॉप्टर उड़ेगा
सेक्टर-1 : इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच उड़ान इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू, महेश्वर, गांधीसागर, मंदसौर, नीमच, हनुमंतिया, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी, अलीराजपुर, रतलाम, झाबुआ, नलखेड़ा शामिल हैं। यानी, मालवा-निमाड़ का बेल्ट शामिल रहेगा। पहले फेज में इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच हेलिकॉप्टर की सप्ताह में 5 दिन नियमित उड़ान रहेगी। सबसे कम किराया 5 हजार तो सबसे ज्यादा साढ़े 6 हजार रुपए है।
इन पांच दिन सेवा होगी
- सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और मंगलवार।
- 2 दिन- बुधवार और गुरुवार को कोई उड़ान नहीं रहेंगी।

सेक्टर-2: भोपाल, पचमढ़ी-मढ़ई के बीच सेवा
इस सेक्टर में भोपाल, मढ़ई, पचमढ़ी, तामिया, छिंदवाड़ा, सांची, इंदौर, दतिया, दमोह, ग्वालियर, शिवपुरी, कूनो, ओरछा, गुना, राजगढ़, सागर, नर्मदापुरम, बैतूल, टीकमगढ़ शामिल हैं। पहले फेज में भोपाल, पचमढ़ी और मढ़ई के बीच उड़ान रहेगी। भोपाल से पचमढ़ी की दूरी 1.10 घंटे में और पचमढ़ी से मढ़ई की दूरी सिर्फ 20 मिनट में तय होगी।
यहां दो तरह की उड़ानें रहेंगी। पहली डायरेक्ट और दूसरी कनेक्टिंग होगी। कनेक्टिंग भोपाल से पचमढ़ी के बीच ही होगी। न्यूनतम 3 हजार और अधिकतम 5 हजार रुपए किराया रहेगा।

सेक्टर-3: दो नेशनल पार्क…मैहर, अमरकंटक-चित्रकूट भी शामिल
इसमें जबलपुर, बांधवगढ़, कान्हा, चित्रकूट, सरसी, परसुली, मैहर, सतना, पन्ना, खजुराहो, कटनी, रीवा, सिंगरौली, अमरकंटक, सिवनी, सीधी, मंडला, पेंच, डिंडौरी शामिल हैं। फस्ट फेज में जबलपुर, मैहर, चित्रकूट, कान्हा, बांधवगढ़, अमरकंटक शामिल हैं।
यानी, दो नेशनल पार्क- कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हेलिकॉप्टर के जरिए पहुंच सकेंगे तो अमरकंटक, चित्रकूट और मैहर जैसे धार्मिक स्थलों पर भी उड़कर आ-जा सकेंगे। सबसे कम किराया मैहर से चित्रकूट का है। वहीं, सबसे ज्यादा 6250 रुपए किराया जबलपुर से कान्हा पार्क तक लगेगा।
