क्या है राजवाड़ा का‌ इतिहास, क्यों बनी थी ये इमारत? जो आज है इंदौर की पहचान

क्या है राजवाड़ा का‌ इतिहास, क्यों बनी थी ये इमारत? जो आज है इंदौर की पहचान


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इंदौर का प्रसिद्ध राजवाड़ा महल, जिसे अब राजवाड़ा कहा जाता है, इसे 1747 में मल्‍हार राव होलकर के द्वारा बनवाया गया था. खाजूरी बाजार के पास यह सात-मंजिला संरचना मराठा, मुगल और यूरोपीय शैलियों का संगम दिखाती है. महल ने होलकर राजवंश के कई शासकों का घर रहा और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह था. आज इसकी लकड़ी-संरचना जर्जर हालत में है और सिंहासन-समय की चमक फीकी पड़ चुकी है.

इंदौर. शहर-हृदय खाजूरी बाजार के पास स्थित राजवाड़ा महल (Rajwada Palace) मराठा होलकर राजवंश द्वारा 18वीं सदी में बनवाया गया एक प्रतिष्ठित स्मारक है. 1747 में मल्हार राव होलकर ने इस महल का निर्माण प्रारंभ किया था. यह सात-मंजिला इमारत आज भी अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है. लेकिन अब इस ऐतिहासिक भवन की हालत चिंताजनक है. महल की वास्तुकला में तीन शैलियों का अद्भुत मिश्रण है: मराठा, मुगल और यूरोपीय. निचले तीन तल पत्थर के बने हैं, ऊपर की मंजिलें लकड़ी की हैं. इस कारण आग-लगने की घटना तथा जर्जरता की समस्या बनी है.

इतिहास ने इस महल को अनेक उतार-चढ़ाव दिए. 1801 में एक बड़े हमले में महल का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था. 1984 में हुए दंगे में ऊपर की लकड़ी की संरचना आग की चपेट में आई थी और निर्माण को अत्यधिक नुकसान हुआ था. आज यह महल पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. लेकिन इसकी मरम्मत और संरक्षा में देरी के कारण यह अपनी पुरानी चमक खोता जा रहा है. शहर की पहचान के इस प्रतीक को फिर से जीवित करने की दिशा में प्रशासन और होलकर परिवार सक्रियता दिखा रहे हैं. स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि राजवाड़ा सिर्फ निर्मित इमारत नहीं, बल्कि इंदौर के सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन का आधार रहा है.

इतिहास का यह पन्ना फिर से जीवंत होगा, अतीत की भव्यता का एहसास 
पर्यटन विभाग की जानकारी के अनुसार यह महल प्रतिदिन सैलानियों को आकर्षित करता है. लेकिन भवन की जर्जर हालत और पर्यावरणीय दबाव ने इसे संकट में डाल दिया है. फिर भी, महल के अंदर लकड़ी के नक़्क़ाशीदार दरवाजे, बड़ी-बड़ी बालकनियाँ, दरबार हॉल जैसे तत्व आज भी दर्शकों को अतीत की भव्यता का एहसास कराते हैं. इंदौर महानगर में इस तरह की विरासत संरचनाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में योजनाएं बनी हैं. प्रशासन ने जीर्णोद्धार और सार्वजनिक-संपत्ति संरक्षण के लिए स्थानीय तथा केन्द्र सरकार से संसाधन जुटाने की बात की है. महल की हालत सुधारने से सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि शहर की आत्म-गौरव लौटाया जा सकता है. स्थानीय लोग इस प्रतीक-स्थल को फिर से चमकता देखना चाह रहे हैं. इतिहास का यह पन्ना फिर से जीवंत होने की उम्मीद जगा रहा है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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