पराली बनेगी कमाई का जरिया! बालाघाट के छात्रों ने बनाया कुर्सी-टेबल और डिस्पोजल

पराली बनेगी कमाई का जरिया! बालाघाट के छात्रों ने बनाया कुर्सी-टेबल और डिस्पोजल


Balagaht News: मध्य प्रदेश के बालाघाट में धान का उत्पादन ज्यादा होता है. ऐसे में यहां धान की खेती का रकबा भी ज्यादा है. धान की खेती अब अंतिम पड़ाव पर है. ऐसे में धान से निकलने वाली पराली का निपटारा किसानों के लिए मुश्किल समस्या है. ऐसे में किसान भाई जल्दी निपटारे के लिए पराली में आग लगा देते हैं. पहले ये समस्या नहीं थी क्योंकि किसान भाई आसानी से इसे स्टोर करते और अपने पशुओं को खिलाते. लेकिन अब पशुपालन कम हुआ है ऐसे में किसान भाई मजबूरी में इसे जला देते हैं. लोकल 18 ने पहले भी आपको इससे खाद बनाने की और खेत में विघटित करने की विधियां बताई है. लेकिन हम अब आपको एक नया आइडिया बता रहे है, जिससे आप एक नया स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं.

दरअसल, बालाघाट के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के विद्यार्थियों ने प्रोफेसर की मदद से एक शानदार नवाचार किया था.  प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों ने पराली का उपयोग कर कुर्सी, टेबल, सोफा सहित फर्नीचरों का निर्माण कर सकते हैं. इसके अलावा दैनिक इस्तेमाल में आने वाले सामान जैसे नाश्ते की प्लेट, ग्लास, कप, कटोरी और गमले भी बना रहे हैं. ऐसे में आप भी पराली से नया स्टार्टअप शुरू कर ये उत्पाद बना सकते हैं.

ऐसे बना सकते हैं ये प्रोडक्ट
छात्र-छात्राओं ने बताया कि यह विचार उनके मन में आपसी चर्चा के दौरान आया, तब उन्होंने अपने प्रोफेसर के मार्गदर्शन में वेस्ट से बेस्ट बनाने की तरकीब खोज निकाली. इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे कर रहे हैं, जिनकी निगरानी में स्टूडेंट्स ने पराली और जंगल में मिलने वाले बेल, मधुमक्खियों के वैक्स और प्राकृतिक गोंद से यह इको-फ्रेंडली फर्नीचर और बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट तैयार किए हैं.

बेहद खास होंगे ये प्रोडक्ट
ये फर्नीचर मजबूत होते हैं और लंबे समय तक टिकते हैं. बनाए गए डिस्पोजल प्रोडक्ट वॉटर रेजिस्टेंट हैं – यानी पानी में गलेंगे नहीं.गर्म भोजन रखने पर भी ये खराब नहीं होते.  प्राकृतिक रूप से तैयार – पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं.

बालाघाट में इसके बिजनेस का है स्कोप
बालाघाट धान उत्पादक जिला है, जहां धान की भरपूर खेती होती है. पराली जो एक समस्या थी अब वह उपयोगी साबित हो रही है. इसके साथ ही यहां सघन वन है, जिनसे बेल और मधुमक्खी के वैक्स भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे. वहीं दूसरी तरफ इन वस्तुओं से जब फर्नीचरों का निर्माण होगा तो जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर भी विराम लगेगा. वहीं, पराली की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी.

शादियों के सीजन में डिस्पोजल की बिक्री बढ़ेगी 
बीते कुछ सालों से प्रदूषण से बचने के लिए सरकार लोगों को जागरूक कर रही है. ऐसे में लोगों का रुझान भी इसकी तरफ बढ़ा है. ऐसे में प्लास्टिक और लकड़ियों से बचने के लिए पराली से बने उत्पाद काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. वहीं, शादियों के सीजन में प्लास्टिक की प्लेटों का इस्तेमाल होता है. लेकिन अगर ऐसे प्रोडक्ट मार्केट में आते हैं, तो प्लास्टिक की प्लेटों से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सकता है.

इस्तेमाल के बाद भी बनेंगा खाद
पराली से बनने वाले प्रोडक्ट इस्तेमाल के बाद खराब भी हो जाते हैं, तो आसानी से खाद भी बनाया जा सकता है. दरअसल, इसके निर्माण में होने वाले तत्व भी प्राकृतिक है, जो आसानी से पर्यावरण में विघटित हो जाएंगे. ऐसे में ये खाद का भी काम करेगा.



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