ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने बिना प्रारंभिक जांच के निलंबन को अनुचित ठहराते हुए एक अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी का निलंबन आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने रितु व्यास की रिट अपील पर यह फैसला सुनाया। पीठ ने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामी
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रितु व्यास दतिया जिले की जनपद पंचायत भांडेर में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने निलंबित किया था।उन्होंने अपने निलंबन आदेश को रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसे एकल पीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि निलंबन में कोई त्रुटि नहीं है। इसके बाद उन्होंने युगल पीठ में रिट अपील दायर की।
युगल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस मामले में न तो कोई प्रारंभिक जांच की गई थी और न ही सक्षम अधिकारी ने आरोपों की गंभीरता पर संतोष दर्ज किया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रारंभिक जांच का मुख्य उद्देश्य आरोपों की सत्यता और गंभीरता का मूल्यांकन करना होता है, ताकि यह तय किया जा सके कि विस्तृत जांच की आवश्यकता है या नहीं। चूंकि इस मामले में प्रारंभिक जांच नहीं की गई थी, इसलिए युगल पीठ ने निलंबन आदेश और एकल पीठ द्वारा रिट खारिज करने के आदेश, दोनों को निरस्त कर दिया।
पीठ ने रितु व्यास को उनके निलंबन से पूर्व के पद पर तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह भी आदेश दिया कि निलंबन अवधि के दौरान रोके गए उनके 50 प्रतिशत पारिश्रमिक का भुगतान दो माह के भीतर किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सक्षम अधिकारी चाहें, तो वे नियमों के अनुसार प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
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ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शिवपुरी जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी गुप्ता की सेवा समाप्ति को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें तत्काल बहाल करने और 50 प्रतिशत बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला अमारपुर गांव से संबंधित है। पूरी खबर पढ़ें