खरगोन में मां नर्मदा नदी के पावन तट पर बसा महेश्वर अपनी ऐतिहासिक विरासत, भव्य किलों, प्राचीन मंदिरों, माहेश्वरी साड़ियों और अद्भुत नक्काशी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. देश-विदेश से यहां पर्यटक ओर श्रद्धालु आते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि महेश्वर को गुप्त काशी कहा जाता है. मान्यता के अनुसार, यह शिवलिंग नर्मदा से प्रकट हुआ था. एक शुभ मुहूर्त में काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित होना था, लेकिन समय से पहुंच नहीं पाया. ऐसे में महेश्वर में ही भव्य मंदिर बनाकर इसकी विधिवत स्थापना करके गुप्त काशी नाम दिया गया. बाद में वर्ष 1786 में देवी अहिल्या बाई होलकर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. इसी तरह 1780 में उन्होंने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी कराया था. दोनों मंदिरों की संरचना में मराठा शैली की एक जैसी छाप साफ नजर आती है.