मतदाता-सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) निरस्त करने के लिए दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने निर्वाचन आयोग और सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता दिलीप कौशल की याचिका पर जवाब में निर्वाचन आयोग ने कहा कि एसआईआर और मतदाता सूची प्रकाशन चुनाव का ही हिस्सा है। इस संबंध में आयोग की ओर से गोवा और एक अन्य शहर का उदाहरण देकर याचिका निरस्त करने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने कहा कि अभी चुनाव नहीं चल रहे हैं, लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में इसे चुनाव से नहीं जोड़ सकते।
हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिंदु कुमार द्विवेदी की युगल पीठ ने मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग, इंदौर कलेक्टर और इंदौर नगरीय क्षेत्र के सभी एसडीएम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कौशल के अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी ने बताया कि इंदौर की मतदाता-सूची में हजारों मतदाताओं का पता “0” होने, अपात्र BLO से कार्य करवाने, 1200 की संख्या से कम 1761 मतदान केंद्र बनाने के विरोध में यह याचिका दायर की है। यह मध्यप्रदेश नगर पालिका निर्वाचन नियम 1994 के नियम 2(m), नियम 5 तथा नियम 6(2) तथा नगर पालिक निगम अधिनियम 1960 के नियमो के तहत विरोधाभासी है। इसलिए इस एसआईआर की प्रक्रिया को निरस्त किया जाना चाहिए।
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