भोपाल के बाद सागर में पेड़ों की हुई कटाई: हाईकोर्ट हुआ सख्त, कहा- 50 साल पुराने पेड़ काटकर विकास नहीं, विनाश कर रहे हैं – Jabalpur News

भोपाल के बाद सागर में पेड़ों की हुई कटाई:  हाईकोर्ट हुआ सख्त, कहा- 50 साल पुराने पेड़ काटकर विकास नहीं, विनाश कर रहे हैं – Jabalpur News


मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई पेड़ कटाई के मामले में हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद सागर कलेक्टर कार्यालय में भी 1000 पेड़ काटे जाने के मामले को संज्ञान में लिया गया है। बुधवार को एक मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करत

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बुधवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बैंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भोपाल और सागर में भारी पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर राज्य सरकार, रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों से कड़ी पूछताछ की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि राजधानी और अन्य जिलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ‘ग्रीन कवर का सीधा विनाश’ है और इसे विकास का नाम नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पूरे भोपाल में पेड़ों की कटाई पर लगाई गई रोक को भी बरकरार रखा है और 7 वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था, जो कोर्ट में उपस्थित हुए। हालांकि पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक मौजूद नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने भोपाल डीआरएम को कोर्ट के समक्ष भेजा था।

राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने दलील देते हुए बताया कि भोपाल में 244 पेड़ों में से 112 को पुर्नस्थापित किया गया है और इसकी तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश की गईं। लेकिन तस्वीरें देखकर कोर्ट भड़क उठा। कोर्ट ने टिप्पणी की “ऐसे ट्रांसप्लांटेशन से पेड़ नहीं बचते, मर जाते हैं। बताइए उस अधिकारी का नाम जिसने इसे ट्रांसप्लांटेशन कहा है। कोर्ट ने कहा कि 50-60 साल पुराने पेड़ों को काटकर यदि नए पेड़ लगाए जाते हैं, तो उन्हें भी इतना ही समय लगेगा उपयोगी बनने में “ग्रीन कवर को इस तरह नष्ट कर, उसे विकास कहना गलत है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि NGT के निर्देशों के बावजूद पेड़ कटाई की अनुमति देने का अधिकार गजटेड फॉरेस्ट ऑफिसर या नगरीय निकाय आयुक्तों को दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह अधिकार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को सौंप दिया, जो नियमों के विरुद्ध है। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही कहा।

8000 पेड़ काटने के आरोप पर रेलवे घिरा हाईकोर्ट ने रेलवे के अधिकारियों से सुनवाई के दौरान पूछा कि वंदे भारत ट्रेन के शेड के लिए 8000 पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने क्यों आई। इस पर रेलवे के अधिकारियों की ओर से बताया गया कि केवल 435 बबूल के पेड़ काटे गए हैं और यह वृक्ष ‘नेशनलाइज्ड’ प्रजातियों की सूची में नहीं आते, इसलिए अनुमति जरूरी नहीं थी। मामले पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि “गाइडलाइन प्रस्तुत करें जिसमें लिखा है कि आप पेड़ काटने से पहले अनुमति नहीं लेंगे।” रेलवे ने इस संबंध में दस्तावेज़ दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया।

सुनवाई के दौरान यह मामला भी सामने आया कि सागर कलेक्टर कार्यालय परिसर में लगभग 1000 पेड़ काटे गए। कोर्ट ने इस पर बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पेड़ों की कटाई की परमिशन देने वाले अधिकारी प्रदूषित प्रदेशों में कुछ दिन रहकर देखें। “आप खुशकिस्मत हैं कि मध्यप्रदेश की हरियाली और स्वच्छ हवा आपको मिल रही है। कुछ दिन प्रदूषण वाले राज्यों में रहकर देखें, तब शायद पेड़ों की कीमत समझ आएगी।” अदालत ने सागर कलेक्टर को नोटिस जारी कर पूछा है कि किसकी अनुमति पर पेड़ काटे गए और कुल कितने पेड़ हटाए गए।

हस्तक्षेप याचिकाकर्ता की अपील नितिन सक्सेना की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश में निजी जमीनों पर भी बिना अनुमति पेड़ काटे जा रहे हैं। अदालत ने प्रतिवादियों से पूछा कि “क्या किसी को अपने घर में लगे बरगद के 50-60 साल पुराने पेड़ को भी काटने की छूट है?”। इसके बाद कोर्ट ने सभी विभागों से विस्तृत एफिडेविट मांगा है, जिसमें अब तक कितने पेड़ काटे गए, कितने पेड़ रीलोकेट किए गए और कितने पेड़ बचे हैं इसकी जानकारी देनी होगी। ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों की उम्र और प्रजाति इन सभी विवरणों को शामिल करना होगा।

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1. भोपाल में नहीं होगा पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन

भोपाल में पेड़ों की कटाई पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। गुरुवार को मामले पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा एवं जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने भोपाल में 488 पेड़ काटे जाने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। पूरी खबर पढ़ें

2. भोपाल कोलार रोड पर पेड़ काटने पर NGT की आपत्ति

भोपाल के कोलार सिक्सलेन के निर्माण में कुल 4105 पेड़ों की कटाई का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पहुंचा है। एनजीटी ने पेड़ काटने पर आपत्ति ली है और अगले 2 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। पूरी खबर पढ़ें



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