मराठा साम्राज्य का वो राजा… जिसे एक ‘प्यार’ ने गद्दी से उतार दिया, अनोखी कहानी

मराठा साम्राज्य का वो राजा… जिसे एक ‘प्यार’ ने गद्दी से उतार दिया, अनोखी कहानी


दीपक पांडेय/खरगोन. इंदौर रियासत के पहले स्थापक मल्हारराव होलकर से लेकर अहिल्या बाई होलकर तक, मराठा होलकरों का गौरवशाली इतिहास देशभर में जाना-पहचाना जाता है, लेकिन इसी शाही वंश में एक ऐसा राजा भी हुआ, जिसकी कहानी इतिहास के पन्नों में दबकर रह गई. एक ऐसा राजा, जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने हत्या के आरोप में दोषी मानते हुए गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और महीनों तक नजरबंद रखा. यह कहानी है होलकर राज्य के 13वें शासक महाराजा तुकोजीराव होलकर तृतीय की, जिनका आज 135वां जन्म दिवस है.

तुकोजीराव होलकर तृतीय का जन्म 26 नवंबर 1890 को खरगोन महेश्वर में हुआ. पिता शिवाजीराव के निधन के बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में वे गद्दी पर बैठे. लेकिन, 87 साल तक जीवित रहने वाले इस राजा के शासन को महज 23 वर्षों में ही अंग्रेजों के एक आरोप ने समाप्त कर दिया. 1926 में उन्हें हटाकर उनके बेटे यशवंतराव होलकर द्वितीय को राजा बना दिया गया, ओर उन्हें 6 महीने तक हाउस अरेस्ट कर लिया गया.

बाबला हत्याकांड ने छीन ली गद्दी
यह घटना लगभग 99 साल पहले बंबई के मालाबार हिल्स इलाके की है. उस समय नगर निगम के पार्षद अब्दुल कदीर बाबला अपनी पत्नी मुमताज के साथ घूमकर लौट रहे थे. तभी कुछ हमलावरों ने मुमताज का अपहरण करने के इरादे से फायरिंग की, जिसमें बाबला की मौत हो गई. हमलावर गिरफ्तार हुए और पूछताछ में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव का नाम सामने आया.

राजनर्तकी मुमताज बनी विवाद की जड़
इतिहासकार दुर्गेश राजदीप बताते हैं कि मुमताज होलकर दरबार की नर्तकी और गायिका थी. कहा जाता है कि महाराज तुकोजी उससे गहरा लगाव रखते थे. लेकिन मुमताज अचानक गायब हो गई. होलकर प्रशासन उसे खोजने में लगा रहा. इसी बीच मुंबई में बाबला की हत्या हुई और शक की सुई सीधे महाराज पर टिक गई. अंग्रेजों ने मान लिया कि घटना के पीछे महाराज का निजी आक्रोश और मुमताज से जुड़ा विवाद है.

कोर्ट में पेश हो या गद्दी छोड़ दो
मामला बंबई हाई कोर्ट पहुंचा. अंग्रेजी हुकूमत ने महाराज हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए दो विकल्प दिए.
1. कोर्ट में पेश होकर ट्रायल का सामना करें.
2. या फिर तुरंत गद्दी छोड़ दें.
लेकिन, होलकर वंश की प्रतिष्ठा और अपनी स्थिति को देखते हुए तुकोजीराव ने गद्दी त्यागने का निर्णय लिया. 26 फरवरी 1926 को उन्होंने सत्ता अपने पुत्र यशवंतराव को सौंप दी.

यहां रहे 6 महीने की हाउस अरेस्ट
गद्दी छोड़ने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ. अंग्रेजों ने महाराज को मंडलेश्वर के ब्रिटिश रेजिडेंस हाउस में छह महीने तक हाउस अरेस्ट रखा गया. नजरबंदी खत्म होने के बाद तुकोजीराव होलकर को गहरा दुख पहुंचा. उन्होंने महेश्वर सहित सियासत को छोड़ने के फैसला लिया और पेरिस चले गए. फिर कभी भारत नहीं लौटे. 21 मई 1978 को 87 वर्ष की उम्र में वहीं उनका निधन हो गया. लेकिन, बाबला हत्याकांड के बाद हाउस अरेस्ट की सच्चाई आज भी इतिहास के पन्नों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलती, लेकिन बुजुर्गों की कहानियां इस घटना को जीवित रखे हुए हैं.

अब यह बिल्डिल एक सरकारी स्कूल 
आजादी के बाद यह ऐतिहासिक इमारत एक सरकारी स्कूल “महात्मा गांधी शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय” के रूप में तब्दील दी गई. इससे पहले यह DIG कार्यकाल भी रहा. जहां प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सलमान खान के दादा अब्दुल रशीद खान भी पदस्थ थे. आज सैकड़ों बच्चे इस स्कूल में पढ़ते है, जहां कभी राजा को कैद किया गया था. लेकिन, अधिकांश लोगों को इस घटना के बारे में नहीं पता है. ओर न ही इतिहास में ज्यादा कुछ मिलता है.



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