महिलाओं की बढ़ेगी आमदनी! कुछ हजार में शुरू करें आलू यूनिट, मिलेगी सब्सिडी भी

महिलाओं की बढ़ेगी आमदनी! कुछ हजार में शुरू करें आलू यूनिट, मिलेगी सब्सिडी भी


सतना. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और आलू आधारित मिनी प्रोसेसिंग यूनिट इसका नया और प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है. घर बैठे छोटे स्तर पर उद्योग शुरू करने का यह अवसर मध्य प्रदेश के सतना और आसपास के जिलों की महिलाओं के लिए एक मजबूत आर्थिक विकल्प साबित हो रहा है. विंध्य क्षेत्र में आलू उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है ऐसे में चिप्स, पापड़ और फ्रोजन आइटम तैयार करके महिलाएं हर महीने हजारों से लाखों रुपये तक की आय हासिल कर सकती हैं. खास बात यह है कि उद्यानिकी विभाग की पीएमएफएमई योजना के तहत मशीनरी पर 35% से 50% तक सब्सिडी मिलने से कारोबार शुरू करना और भी आसान हो गया है.

आलू चिप्स प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना का खर्च पूरी तरह आपकी क्षमता और प्लांट के प्रकार पर निर्भर करता है. घर से छोटी यूनिट की शुरुआत न्यूनतम लागत में की जा सकती है, जिसके लिए केवल एक साधारण स्लाइसर, तेल, मसाले और पैकिंग सामग्री की आवश्यकता होती है. यह व्यवस्था 10 हजार से 20 हजार रुपये में आसानी से तैयार हो जाती है. इससे महिलाएं बिना किसी भारी निवेश के बाजार में अपनी जगह बना सकती हैं.

सेमी और फुल ऑटोमैटिक प्लांट की बढ़ती मांग
यदि कोई उद्यमी व्यवसाय को बड़े पैमाने पर स्थापित करना चाहता है, तो सेमी ऑटोमैटिक और फुल ऑटोमैटिक प्लांट उसके लिए फायदेमंद साबित होते हैं, जिसमें सेमी ऑटोमैटिक लगभग 3.5 लाख रुपये से शुरू होता है. इसमें धुलाई, छीलने, काटने, तलने, मसाला मिलाने और पैकेजिंग की अलग-अलग मशीनें शामिल होती हैं. फुल ऑटोमैटिक मशीन की लागत 17 लाख रुपये से 25 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है. यह मशीन आधुनिक तकनीक से लैस होती है और उच्च क्षमता के साथ लगातार उत्पादन कर सकती है. बेहतर गुणवत्ता वाली मशीनें लंबे समय तक चलती हैं लेकिन उनकी कीमत अधिक होती है. प्रतिदिन कितनी मात्रा में चिप्स या पापड़ तैयार करना है, यह लागत तय करने का मुख्य आधार है. जितना अधिक सिस्टम स्वचालित होगा, उतनी ही अधिक लागत आएगी. इसमें जगह, बिजली, पानी, कच्चा माल, लाइसेंस और श्रमिकों के प्रशिक्षण का खर्च शामिल होता है. कच्चे माल को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि एक किलो चिप्स तैयार करने के लिए लगभग तीन किलो आलू की आवश्यकता होती है, इसलिए कच्चे माल की उपलब्धता और गुणवत्ता पर खास ध्यान देना जरूरी है.

महिलाओं के लिए बड़ा अवसर पीएमएफएमई योजना
सोहावल विकासखंड की वरिष्ठ उन्नयन विकास अधिकारी सुधा पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पीएमएफएमई योजना ग्रामीण उद्यमियों के लिए बेहद लाभकारी है. इस योजना के तहत लाभार्थी 50 हजार रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक का उद्योग शुरू कर सकता है. योजना में 35% तक सब्सिडी उपलब्ध है और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है.

आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही महिलाएं
उन्होंने बताया कि विंध्य क्षेत्र में कई महिलाएं पहले से ही छोटे स्तर पर पापड़ एवं चिप्स उद्योग चला रही हैं. ब्रांडिंग और पैकेजिंग के साथ तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और महिलाएं आसानी से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. घर में ही पापड़, चिप्स और अन्य आलू उत्पाद बनाकर उन्हें स्थानीय बाजार, किराना दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया जा सकता है. सतना जैसे जिलों में यह मॉडल खासा सफल हो सकता है क्योंकि यहां आलू उत्पादन भी प्रचुर मात्रा में है और महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.



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