‘3-4 बार घर जाना पड़ता है…’ MP में SIR अभियान की असली तस्वीर, BLO की 17 घंटे की जंग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

‘3-4 बार घर जाना पड़ता है…’ MP में SIR अभियान की असली तस्वीर, BLO की 17 घंटे की जंग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट


Ground Report: मध्य प्रदेश में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण जारी है. इसी अभियान की वास्तविक स्थिति जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने सीधी जिले के चुरहट विधानसभा के प्रथम मतदान केंद्र नंबर 1 पर पूरे दिन बीएलओ के साथ रहकर देखा कि यहां सर्वे वास्तव में कैसे चलता है और इसे पूरा करने के लिए फील्ड में काम करने वाले बीएलओ कितनी मेहनत करते हैं.

रामपुर नैकिन तहसील के ग्राम पंचायत पटना की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बीएलओ अरुणा देवी मिश्रा मंगलवार की सुबह 6 बजे घर से निकल जाती हैं और रात 11 बजे घर वापस लौटती हैं. पति आशुतोष मिश्रा के दुखद निधन के बाद घर-परिवार और काम की दोहरी जिम्मेदारी संभालते हुए अरुणा इन दिनों पूरी तरह SIR अभियान में जुटी हुई हैं.

गांव में घर-घर पहुंचकर वह मतदाताओं को फॉर्म देती हैं, कॉलम समझाती हैं, दस्तावेज चेक करती हैं. अरुणा देवी धैर्य से हर मतदाता को समझाती हैं. फॉर्म में एक-एक कॉलम बताती हैं. कोई नाम गलत है तो सुधार करवाती हैं, कोई नया वोटर है तो फॉर्म 6 भरवाती हैं. इसी में सुबह के दो-तीन घंटे गुजर गए, अरुणा देवी कहना है कि कई बार एक ही घर में 3-4 बार जाना पड़ता है. कोई खेत में होता है, कोई मजदूरी पर गया होता है, तो किसी को फॉर्म भरना ही मुश्किल लगता है. लेकिन अभियान चल रहा है, इसलिए घर घर पहुंचना जरूरी है.

पटना गांव के वार्ड क्रमांक 5 के मतदाता रमेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि मैं मूल रूप से सीधी शहर में निवास करता हूं, लेकिन एसआईआर की वजह से हमें गांव आना पड़ा है. यह जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा बताई गई हमारे घर में कुल 12 सदस्य हैं. मैडम को मैंने फोन लगाया तो घर में आकर मेरा फॉर्म सबमिट करवार ही है. मैडम रात दिन बस निर्वाचन के काम में ही लगी रहती हैं.

अरुणा देवी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं. दोपहर होते ही वह सीधे आंगनवाड़ी पहुंचती हैं, जहां मंगलवार को मंगल दिवस मनाया जा रहा है. महिलाएं और बच्चे वहां पहले से कार्यकर्ता का इंतजार कर रही होती है. अरुणा देवी सहायिका से पंजीरी पैकेट मंगवाती हैं और बच्चों को पोषण आहार देती हैं. महिलाएं उन्हें देखकर मुस्कुराती हैं. लेकिन ज्यादा समय वह आंगनवाड़ी भी नहीं रुक सकतीं, क्योंकि पंचायत में भी फॉर्म भरने की जानकारी लेने के लिए भीड़ लगनी शुरू हो जाती है.ग्राम पंचायत पटना में दोपहर बाद लोगों की भीड़ बढ़ने लगती है. किसी को फॉर्म 6 भरना है, किसी का नाम कट गया है, कोई 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट खोजते हुए परेशान है. हर कोई चाहता है कि उसकी समस्या तुरंत हल हो जाए.

इस अभियान में उनका साथ रोजगार सहायक शिवम कुमार सोनी और शिक्षिका श्रद्धा शुक्ला दे रही हैं. शिवम ने बताया कि पटना और शरदा गांव मिलकर ग्राम पंचायत में कुल 1145 मतदाता हैं, जिनमें से अब तक 898 फॉर्म ऑनलाइन किए जा चुके हैं. सब लोग मिलकर दिन-रात काम कर रहे हैं.

शिक्षिका श्रद्धा शुक्ला मूल रूप से मैहर जिले के रामनगर की निवासी हैं, लेकिन सर्वे का काम प्रभावित न हो इसलिए वह गांव के पास ही कमरा किराये पर लेकर रह रही हैं. सुबह से रात तक फील्ड व फीडिंग का काम संभाल रही हैं. शाम 7-8 बजे तक फील्ड में रहती हैं. फिर घर जाकर ऑनलाइन फीडिंग करती हैं. पूरे दिन भरे गए फॉर्म ऑनलाइन अपलोड करने पड़ते हैं. अरुणा थकान के बावजूद वह लगातार डेटा फीडिंग करती हैं, क्योंकि उनके अनुसार गलती होने पर किसी का मताधिकार प्रभावित हो सकता है.

अरुण मिश्रा ने न्यूज़ 18 को जानकारी देते हुए बताया कि काम बहुत अच्छे से चल रहा है, जो शासन दिया है उनके निर्देशों का पालन कर रहे हैं 6:00 बजे सुबह घर से निकलते हैं. फीडिंग करते हुए रात 12 से 1:00 बज जाता है जितने फॉर्म भरते हैं जब तक कंप्लीट नहीं हो जाता है.ऑनलाइन फीडिंग करनी पड़ती है. इस काम में तीन लोगों का सहयोग मिला हुआ है. फीडिंग का काम शिक्षिका श्रद्धा शुक्ला और रोजगार सहायक शिवम सोनी भी कर रहे हैं, हम तीनों लोग अच्छे से सब मिलकर काम कर रहे हैं और अच्छा काम भी दिख रहा है. पटना और शरदा गांव मिलकर ग्राम पंचायत में करीब 1145 मतदाता है. अब तक लगभग 898 फॉर्म ऑनलाइन हो गया है करीब 78 परसेंट कंप्लीट हो चुका है. मतदाताओं के घर तीन से चार बार जाना पड़ता है अगर कोई फॉर्म भर दिया तो ठीक है नहीं तो उनका मैं फॉर्म भी भरते.

शासकीय माध्यमिक शाला पटना में पदस्थ शिक्षिका श्रद्धा शुक्ला एसआईआर के काम में सहयोग कर रही हैं. मूल रूप से वह मैहर जिले के रामनगर की निवासी है. लेकिन एसआईआर की काम की वजह से यही पास ही में रूम लेकर रह रही हैं. ताकि निर्वाचन का काम प्रभावित ना हों. श्रद्धा शुक्ला ने न्यूज़ 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सुबह उठकर खाना पीना बनाती हैं और निर्वाचन के काम के लिए फील्ड पर निकल जाती हूं. अटेंडेंस के लिए स्कूल आना पड़ता है. अटेंडेंस के बाद हम फील्ड में ही काम करना पड़ता है. जैसा सुविधाजनक लगता है वैसा ग्राम पंचायत में भी फीडिंग का काम करना पड़ता है. फीडिंग के अलावा अगर कोई गांव का मतदाता आ जाता है तो उसको समझते हैं और उनका फॉर्म भी भरते हैं रात में 7 से 8:00 बजे तक फील्ड में ही काम करते हैं. उसके बाद हम घर में जाते हैं तो जब तक ऑनलाइन नहीं हो जात तक फीडिंग का काम करते हैं.



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