IND vs SA: साउथ अफ्रीका ने भारत को टेस्ट सीरीज में 2-0 से रौंदा. पहले टेस्ट में 30 रन की हार थी तो दूसरे में जख्म पर कील ठोकते हुए इसे 408 में बदल दिया. हेड कोच गौतम गंभीर ने खुद को हार का दोषी माना. लेकिन उनकी ट्रोलिंग थमने का नाम नहीं ले रही है. पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने भी डंके की चोट पर उनकी क्लास लगा दी. उन्होंने गहरी चिंता जताई क्योंकि भारत को अपने घर में अब तक की सबसे बड़ी हार मिली. पिछले 7 घरेलू टेस्ट में टीम इंडिया ने गंभीर के काल में 5 मैच गंवा दिए हैं.
पोस्ट से मची खलबली
प्रसाद ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘इंडिया जिस तरह से टेस्ट क्रिकेट खेल रहा है, उससे सच में बहुत निराश हूं. ऑल-राउंडर का जुनून बिल्कुल दिमाग से निकल जाता है, खासकर तब जब आप उन्हें बॉलिंग नहीं करते. खराब टैक्टिक्स, खराब स्किल्स, खराब बॉडी लैंग्वेज और घर पर 2-0 से सीरीज़ में पहले कभी नहीं हारना. उम्मीद है कि टेस्ट मैच 9 महीने दूर होने पर यह सब खत्म नहीं होगा और यह नेगेटिव सोच बदलेगी.’
स्पेशलिस्ट प्लेयर की जरूरत- वेंकटेश प्रसाद
उन्होंने कहा, ‘स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों को खिलाने की जरूरत है और घरेलू क्रिकेट में रणजी, दलीप ट्रॉफी के आधार पर खिलाड़ियों को चुना जाना चाहिए. 50 ओवर में IPL परफॉर्मेंस के आधार पर चुना जा सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के लिए रणजी और दलीप ट्रॉफी को पैमाना होना चाहिए. यश राठौड़, शुभम शर्मा, बाबा इंद्रजीत, स्मरण रविचंद्रन ऐसे नाम हैं जिनके बारे में ज़्यादातर लोगों ने नहीं सुना होगा क्योंकि वे IPL नहीं खेलते हैं लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं.’
ये भी पढ़ें.. WPL Auction: एक मैच में 7 विकेट लेने वाली प्लेयर अनसोल्ड, वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया की टॉप विकेट टेकर, किसी ने नहीं दिया भाव
‘देखकर दुख होता है..’
उन्होंने आईपीएल का उदाहरण देते हुए कहा, ‘IPL परफॉर्मेंस के आधार पर टेस्ट टीम में 40 FC एवरेज से कम के खिलाड़ियों को नहीं खिलाया जा सकता. भारतीय हालात में ऑलराउंडर को सिर्फ इसलिए खिलाना क्योंकि वह बैटिंग कर सकता है, टेस्ट क्रिकेट में सही तरीका नहीं है. टेस्ट क्रिकेट को स्पेशलिस्ट की जरूरत है. हम सभी भारतीय क्रिकेट से प्यार करते हैं और यह देखकर दुख होता है कि पिछले डेढ़ साल में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ इस गलत स्ट्रैटेजी को सही साबित करने के लिए है. भारतीय क्रिकेट के हित में ऐसे ईगो पर काम नहीं किया जा सकता, यह सच में निराशाजनक है.’