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Blind Women Cricketer Sushma Patel Story: भारत की दृष्टि बाधित महिला टीम ने कोलंबो में T20 वर्ल्ड कप जीत कर इतिहास रच दिया है. इस जीत में बुंदेलखंड के दमोह की बेटी का भी सराहनीय योगदान रहा. छोटे से गांव की बेटी सुषमा पटेल ने टीम का प्रतिनिधित्व किया. जानें उनकी कहानी पिता की जबानी…
blind women T20 World Cup टीम का हिस्सा रहीं सुषमा पटेल के लिए यह सब कुछ इतना आसान नहीं था. क्योंकि, इनके पिता बाबूलाल पटेल एक छोटे खेती हर मजदूर किसान हैं. उनके पास मात्र डेढ़ एकड़ जमीन है. इसी से यह अपने परिवार का गुजारा करते हैं.

बाबूलाल पटेल ने बताया, मुझे आज भी याद है, जब हम मजदूरी करने के लिए 35-35 किलोमीटर दूर साइकिल चलाकर जाया करते थे, कभी-कभी मजदूरी नहीं मिलने पर घर में कुछ खाने को भी नहीं होता था. तब हम लोगों को हरी सब्जियों के पत्ते खाकर दिन गुजारने पड़ते थे.

हमारी बेटी सुषमा पटेल अपने संघर्ष के दिनों को आज भी नहीं भूली है. हम लोगों को भी अपनी बेटी पर गर्व है कि आज उसने न सिर्फ परिवार का नहीं, बल्कि जिला और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है.
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सुषमा के पिता बाबूलाल बताते हैं कि जब सुषमा छोटी थी, तब उसके भाई अभिषेक धनुष बाण का खेल खेल रहा था. इसी दौरान एक तीर आकर सीधा सुषमा की आंख में लग गया था. इसकी वजह से उसकी आंख की रोशनी चली गई. दूसरी आंख से भी कम दिखाई देने लगा.

लेकिन, इसके बावजूद सुषमा की क्रिकेट खेलने की रुचि कम नहीं हुई. फिर भाई का भी सहयोग उसे मिलने लगा. भाई से जो गलती हो गई थी, उसके बदले में उसने बहन को क्रिकेट में आगे बढ़ाया. अपने साथ प्रशिक्षण दिलाया. 1 साल पहले ही उसे ब्लाइंड टीम का कप्तान बनाया गया था.

सुषमा दमोह जिले की जबेरा विधानसभा कमें आने वाले एक छोटे से गांव घाना मैली की रहने वाली हैं. सुषमा का पूरा परिवार यही रहता है.

सुषमा के पिता बाबूलाल पटेल ने बताया, उनके परिवार में आठ सदस्य हैं. पत्नी लक्ष्मीबाई, तीन बेटी, दो बेटे और एक बहू. पूरा परिवार एक एकड़ भूमि पर आश्रित है. मात्र एक कच्चे मकान में परिवार के सभी सदस्य रहते हैं. फिलहाल, पिछले कुछ सालों से इस जमीन पर सब्जियों की खेती कर रहे हैं.

सुषमा की उपलब्धि पर आज हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है. उनके संघर्ष की कहानी को जानना चाह रहा है. क्योंकि, उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और यह मुकाम हासिल किया है.