शहडोल के ब्यौहारी सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का मामला सामने आया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 14 वर्षीय बालक को इलाज मिलने में देरी हुई, क्योंकि अस्पताल का पर्ची काउंटर बंद था। परिजन घायल बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे,
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परिजन ने बताया कि हादसे में बालक का पैर बुरी तरह टूट गया था और वह दर्द से कराह रहा था। वे सीधे इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, जहां मौजूद डॉक्टर ने स्पष्ट कहा कि पर्ची के बिना इलाज संभव नहीं है। घायल की गंभीर स्थिति के बावजूद, अस्पताल प्रशासन ने तत्काल मदद करने से मना कर दिया।
लगभग आधे घंटे तक बालक स्ट्रेचर पर दर्द से तड़पता रहा। परिजन पर्ची काउंटर खोलने के लिए कर्मचारियों को ढूंढते रहे, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। मजबूर होकर परिजनों ने मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश मिश्रा को फोन पर पूरी जानकारी दी।
सीएमएचओ के निर्देश पर इलाज शुरू किया
सीएमएचओ ने तत्काल अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए, जिसके बाद चिकित्सा दल हरकत में आया और घायल बालक का उपचार शुरू हुआ। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर इलाज शुरू हो जाता तो बच्चे को इतनी तकलीफ नहीं झेलनी पड़ती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्यौहारी अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही, काउंटरों का मनमाने समय पर बंद होना और आपातकालीन सेवाओं में देरी आम बात है। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में औपचारिकताओं के कारण मरीजों को होने वाली परेशानी को उजागर करती है।
सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा ने घटना की जांच की बात कही है। उन्होंने बताया कि बच्चे का इलाज कर दिया गया है और इस मामले में बीएमओ को जांच के आदेश दिए गए हैं।