नेशनल हाईवे 44 पर 30 मह से निर्माण काम जारी: नरसिंहपुर में 8 ओवरब्रिज से धूल, गिट्टी और हादसों की समस्या – Narsinghpur News

नेशनल हाईवे 44 पर 30 मह से निर्माण काम जारी:  नरसिंहपुर में 8 ओवरब्रिज से धूल, गिट्टी और हादसों की समस्या – Narsinghpur News


हाइवे पर गिट्टी में ट्रक फंस गया जिसे मशीन से निकालना पड़ा।

नरसिंहपुर में नेशनल हाईवे 44 पर बन रहे आठ ओवरब्रिज स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। पिछले लगभग 30 महीने से जारी निर्माण कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं के कारण लोग धूल, गिट्टी और दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहे हैं।

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लोग बोले-दो किलोमीटर तक धूल के गुबार छाए रहते हैं

स्थानीय निवासियों के अनुसार, ओवरब्रिजों के दोनों सिरों पर करीब दो किलोमीटर तक धूल के गुबार छाए रहते हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर गिट्टी बिखरी पड़ी है और सड़कें अधूरी छोड़ दी गई हैं।

ठेकेदार की ओर से निर्माण क्षेत्र में गिट्टी डालकर छोड़ देने से बड़े वाहनों के टायरों में फंसकर पत्थर उछलते हैं, जिससे वाहन फिसलने और टायर पंचर होने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसके अलावा, जहां रोडरोलर का इस्तेमाल होना चाहिए, वहां सामान्य वाहनों से ही सड़क समतल करने का काम किया जा रहा है, जो निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

निर्माणाधीन स्थलों पर छोटे-बड़े कई हादसे हुए

ये ओवरब्रिज डांगीढाना तिराहा, ख़मतरा तिराहा, टट्टापुल खैरीनाका, कृष्णा ढाबा करेली, इमलिया तिराहा करेली, गोंगावली तिराहा करेली, लिंगा और बरमान जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर निर्माणाधीन हैं।

इन निर्माणाधीन स्थलों पर न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है, बल्कि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में कई छोटे-बड़े हादसे दर्ज किए गए हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

अधूरे सड़क निर्माण से धूल, मिट्टी और गड्ढों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश

हाल ही में जिला प्रशासन की एक बैठक में कलेक्टर ने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इन निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थितियों में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है।

इस मामले पर जानकारी और आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए एनएचएआई के परियोजना निदेशक (पीडी) राहुल चहल से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।



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