बुरहानपुर में कपास के दाम गिरने से किसान परेशान, फसल में चरा रहे हैं पशु

बुरहानपुर में कपास के दाम गिरने से किसान परेशान, फसल में चरा रहे हैं पशु


Last Updated:

Burhanpur Cotton Protest: किसान सुनील महाजन ने कहा कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में केला कपास और गन्ने की सबसे अधिक खेती होती है. इन दिनों कपास के दम नहीं मिल रहे हैं. जिस कारण हम अपने खेतों में लगी हुई कपास की फसल में पशु छोड़ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में केला कपास और गन्ने की खेती सबसे अधिक होती है. लेकिन इन दिनों कपास के भाव सही नहीं मिल रहे हैं. जिसको लेकर अब किसान अपनी फसलों में ही पशुओं को चरा रहे हैं. लोनी के किसान सुनील महाजन का कहना है कि कपास की खरीदी खंडवा में हो रही है. हमको वहां तक कपास लेकर जाने के लिए जितना भाव नहीं मिल रहा है उससे डबल भाड़ा लग रहा है. इसलिए हम अपने खेतों में पशु को ही चरा रहे हैं किसान ने दो एकड़ खेत में कपास की खेती की है. आसपास के क्षेत्र के किसानों के भी हालत बने हुए हैं.

किसान ने दी जानकारी 
टीम ने जब लोनी के किसान सुनील महाजन ने कहा कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में केला कपास और गन्ने की सबसे अधिक खेती होती है. इन दिनों कपास के दम नहीं मिल रहे हैं. जिस कारण हम अपने खेतों में लगी हुई कपास की फसल में पशु छोड़ रहे हैं. पशुओं का पेट भर जाए उनको चारा मिल जाए. हमको तो दाम नहीं मिल रहे हैं. बुरहानपुर में कपास की खरीदी नहीं हो रही है. खंडवा यदि कपास किसान ले जाते हैं तो जितना भाव नहीं है उससे अधिक तो हमको भाड़ा देना पड़ेगा. इसलिए हमारे सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. अब हम पशु को ही अपनी फसले खिलाने के लिए मजबूर हो गए हैं. लेकिन सरकार और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं.

5 से ₹6000 क्विंटल मिल रहा है भाव 
किसानों का कहना है कि हमने फसल को तैयार करने के लिए लाखों रुपए लगा दिए हैं. जिसमें तोड़ने की अलग मजदूरी लग रही है और भाव कम मिलने से हमारी लागत भी नहीं निकल रही है. इसलिए हम अपने खेतों में लगी फसलों को पशुओं को खिला दे रहे हैं. ताकि उनका भी पेट भर जाए. लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है. सरकार के जिम्मेदारों ने ध्यान देकर मुआवजा देना चाहिए और बुरहानपुर में ही खरीदी करना चाहिए. हम यही हमारी फसले बेच सके.

homeagriculture

बुरहानपुर में कपास के दाम गिरने से किसान परेशान, फसल में चरा रहे हैं पशु



Source link