कभी मचान तो कभी पहाड़ी पर चढ़ रहे BLO: MP में SIR के लिए नेटवर्क बना सिरदर्द; कहीं-कहीं तो जंगली जानवरों से भी खतरा – narmadapuram (hoshangabad) News

कभी मचान तो कभी पहाड़ी पर चढ़ रहे BLO:  MP में SIR के लिए नेटवर्क बना सिरदर्द; कहीं-कहीं तो जंगली जानवरों से भी खतरा – narmadapuram (hoshangabad) News


मध्यप्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में लगे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। कभी वे ऊंचे मचानों पर चढ़ रहे हैं, तो कभी घने जंगलों में भटक रहे हैं। कर्मचारी जान जोखिम में डालकर जंगली जानवरों के खतरे व

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ग्राम नर्री में BLO नंदलाल इवने को एक मतदाता की झोपड़ी के बाहर बैठकर जानकारी लिखनी पड़ी, क्योंकि वहां नेटवर्क कमजोर था। पीपलकोटा में BLO अजय उइके मचान पर बैठकर ऑनलाइन डाटा लोड कर रहे थे। बारासेल में BLO लखनलाल यादव को गांव से ढाई किमी दूर जंगल में ऊंची पहाड़ी पर जाकर नेटवर्क ढूंढना पड़ा।

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को आ रही नेटवर्क की समस्या को लेकर दैनिक भास्कर की टीम मंगलवार को नर्मदापुरम जिले से 90 किमी दूर बसे वनग्राम नर्री, पीपलटोला, बारासेल गांव पहुंची। यहां बीएलओ के साथ टीम ने 4 घंटे का समय बिताया। यह इनसे जाना कि SIR सर्वे करने में बीएलओ कैसे-कैसे जोखिम उठा रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

नेटवर्क नहीं मिलने पर बीएलओ को पहाड़ी पर बैठकर काम करना पड़ा।

230 विधानसभा में 4 नवंबर तक SIR

मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा में 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम चल रहा है। प्रदेश के कुल 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार वोटर्स के फॉर्म डिजिटलाइज करने हैं। बीएलओ को हर घर में तीन बार जाना है। इस काम में 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें बीएलओ को काफी हार्ड वर्क करना पड़ रहा है। काम के तनाव की वजह से उनकी जान पर बन आई है। किसी को बीमारी हो रही तो किसी की हार्टअटैक आ रहा। एक तो बीएलओ को एक्सीडेंट की घटना में अपनी जान गवां चुके है।

एक नजर में एसआईआर सर्वे

  • MP में 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार मतदाता
  • 64014 पोलिंग बूथ बीएलओ
  • 1 लाख 19 हजार 940 राजनैतिक दल
  • 762 सहायक रिटर्निंग अफसर
  • 55 जिला निर्वाचन अधिकारी।

अब पढ़िए बीएलओ को क्या-क्या दिक्कतें आ रहीं

बीएलओ ग्रामीण और मजदूरों को तलाश रहे हैं, ताकि वे अपना पूरा काम समय पर खत्म कर सकें।

बीएलओ ग्रामीण और मजदूरों को तलाश रहे हैं, ताकि वे अपना पूरा काम समय पर खत्म कर सकें।

मजदूरों को खेतों पर तलाश रहे, नेटवर्क मिल नहीं रहा

दोपहर 1 बजे, ग्राम नर्री, पोलिंग बूथ क्रमांक 140: जियो कंपनी के मोबाइल नेटवर्क के सिग्नल मात्र थे और बीएसएनएल नेटवर्क बंद था। बीएलओ नंदलाल इवने एक मतदाता की झोपड़ी के बाहर बैठे मिले, जो मतदाता से आवश्यक दस्तावेज देखकर प्रपत्र में जानकारी लिख रहे थे। बीएलओ इवने से सर्वे को लेकर पूछने पर उन्होंने कहा कि उनके पास घोटा वर्री, नर्री, सालई गांव हैं।

एसआईआर सर्वे में पत्रक में जानकारी एकत्रित करने में परेशानी यह है कि पूरे ग्रामीण व मजदूर वर्ग सुबह से खेतों में या दूसरे गांव मजदूरी के लिए चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें ढूंढने जाना होता है। जो शादीशुदा महिला हैं, उनके मायके से जानकारी नहीं मिल रही। मोबाइल नेटवर्क जहां मिलता है वहीं बैठकर ऑनलाइन लोड करते हैं।

समय सीमा में काम करने का दवाब है, अबतक उनका 60 फीसदी काम हो चुका है। करीब आधे घंटे तक बीएलओ के साथ गांव में घूमते रहे। 200 मीटर दूर वन चाैकी, स्कूल के पास नेटवर्क मिला, जहां बीएलओ अपना काम करने बैठ गए।

मचान पर बैठकर काम करते हुए बीएलओ।

मचान पर बैठकर काम करते हुए बीएलओ।

मचान पर चढ़कर काम कर रहे बीएलओ

दोपहर 2.30 बजे, स्थान पीपलकोटा, पोलिंग बूथ 137: माध्यमिक स्कूल से दो किलोमीटर दूर एक खेत की मचान पर बैठकर बीएलओ अजय उइके एसआईआर का काम कर रहे थे। भास्कर ने जब बीएलओ उइके से बात की तो उनका कहना था कि एसआईआर सर्वे में वे ऑनलाइन डाटा अपलोड कर रहे हैं, जिसके लिए इंटरनेट आवश्यक है। गांव में माेबाइल नेटवर्क नहीं है।

खेत में मचान पर अच्छा नेटवर्क मिलता है, इसलिए यहां आकर ऑनलाइन फीडिंग कर रहे हैं। गांव में जाकर ऑफलाइन फार्म भरते हैं। शुरुआत में काफी दिक्कत हुई। एक सप्ताह बीएसएनएल का मोबाइल नेटवर्क बंद था। अब पिछले एक सप्ताह में उन्होंने 8 दिन में 95 फीसदी काम पूरा कर चुके हैं। 660 में से 19 मतदाताओं की जानकारी बाकी है।

बारासेल में नेटवर्क नहीं मिलने पर बीएलओ को पहाड़ी पर जाना पड़ता है।

बारासेल में नेटवर्क नहीं मिलने पर बीएलओ को पहाड़ी पर जाना पड़ता है।

पहाड़ी पर जाकर नेटवर्क की तलाश, वन्यप्राणियों का खतरा

शाम 4 बजे, स्थान बारासेल, पोलिंग बूथ क्रमांक 140: बैतूल जिले की सीमा से सटे बारासेल के शिक्षक लखनलाल यादव बीएलओ है। यादव का कहना है कि एसआईआर सर्वे को ऑनलाइन लोड करने के लिए गांव से ढाई किमी दूर जंगल में ऊंची पहाड़ी पर जाना पड़ता है। जहां जंगली जानवर, वन्यप्राणियों का मूवमेंट रहता है। ऐसे में वन्यप्राणियों के हमले का खतरा बना हुआ है।

यहां मोबाइल से बीएलओ एप ओपन कर बार कोड स्कैन करते हैं। जियो कंपनी के दो सिग्नल होने से बार-बार इंटरनेट इरर आया। 5 मिनट बाद एप ओपन हुई और 20 मिनट के बाद एक मतदाता का फार्म भरा पाया गया। बीएलओ लखनलाल ने बताया कि मोबाइल नेटवर्क नहीं होना सर्वे की सबसे बड़ी परेशानी है।

उन्होंने कहा कि एक मतदाता की जानकारी अपलोड होने में मात्र 40-60 सेकंड लगते हैं, लेकिन यहां बेकार नेटवर्क व इंटरनेट की परेशानी होने से 20 से 25 मिनट लग रहे हैं। इसलिए एसआईआर सर्वे में ऑफलाइन फॉर्म भरकर नेटवर्क एरिया में पहुंचकर ऑनलाइन अपलोड करते हैं। अधिकांश काम अपने गांव साधपुरा में जाकर करना पड़ रहा है।

BLO घर-घर जाकर पत्रकों को भर रहे हैं, ताकि काम को जल्दी से खत्म किया जा सके।

BLO घर-घर जाकर पत्रकों को भर रहे हैं, ताकि काम को जल्दी से खत्म किया जा सके।

जिले में कई गांवों में नेटवर्क बना परेशानी

जिले के कई गांवों में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है, जिससे बीएलओ (शिक्षक) परेशान हैं। सिवनीमालवा के बारासेल, पीपलकोटा और नर्री जैसे गांवों में मोबाइल नेटवर्क की दिक्कतें हैं। पिपरिया, सोहागपुर और केसला क्षेत्र के गांवों में भी यही हाल है, जहां बीएलओ जोखिम उठाकर काम कर रहे हैं। सिवनी मालवा के 18 गांवों में नेटवर्क न होने से एसआईआर सर्वे प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों को मतदाताओं की ऑनलाइन सूची नहीं मिल पा रही है, जिससे वे घर-घर जाकर ऑफलाइन फॉर्म भर रहे हैं और फिर नेटवर्क वाले इलाकों में जाकर डेटा अपडेट कर रहे हैं। बीएसएनएल ने जिले के 500 नेटवर्क विहीन गांवों में 4जी टावर लगाए हैं, लेकिन सिवनी मालवा क्षेत्र में अब भी नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। कई गांवों में टावर होने के बावजूद नेटवर्क नहीं मिलता, जैसे बारासेल में बीएसएनएल टावर के पास भी नेटवर्क नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बीएसएनएल नेटवर्क अक्सर बंद रहता है और इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इस वजह से बीएलओ को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मप्र में 10 दिन में 7 बीएलओ की मौत हो चुकी

  1. शहडोल में बीएलओ मनीराम नापित की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
  2. नर्मदापुरम में सहायक शिक्षक सुजान सिंह रघुवंशी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई।
  3. मंडीदीप में बीएलओ रमाकांत पांडे की ऑनलाइन मीटिंग के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई।
  4. झाबुआ जिले में शिक्षक भुवान सिंह चौहान की निलंबन के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई।
  5. दमोह में बीएलओ सीताराम गोंड की इलाज के दौरान मौत हो गई।
  6. बालाघाट में बीएलओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता नागेश्वर की नागपुर में मौत हो गई।
  7. रीवा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वीणा मिश्रा की सीधी जिले में हार्ट अटैक से मौत हो गई।



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