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Balaghat News: आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली धनुष उर्फ मुन्ना हिंदी और अंग्रेजी की अच्छी जानकारी रखता है. वहीं उसे कंप्यूटर और दूसरी चीजों का भी अच्छा ज्ञान है. वह संगठन में टेक्निकल काम देखता था.
बालाघाट. 35 सालों से लाल आतंक की जद में रहा मध्य प्रदेश का बालाघाट अब उनसे मुक्ति की राह पर है. अब एमएमसी जोन में सक्रिय माओवादी सरेंडर करना चाहते हैं. माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर के साथ 15 नक्सली भी आए थे. अब उसकी आधी टीम लगभग खाली हो चुकी है. इसी क्रम में अब नक्सली कपल ने बदलते हालात को देखते हुए सरेंडर की राह चुनी. दोनों नक्सली कपल बालाघाट में सक्रिय रहे लेकिन उन्होंने छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में सरेंडर किया. दरअसल हाल ही में एमएमसी जोन में मुठभेड़ हुई थी, जहां इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हुए थे. ऐसे में नक्सली बालाघाट की सीमा से दूर हो रहे हैं.
बालाघाट में मुठभेड़ में रहे शामिल
दोनों नक्सली कपल जीआरबी डिवीजन के टांडा-मलाजखंड दलम के सदस्य थे. वे कई नक्सली घटनाओं में सक्रिय भी रहे. 20 मई को बिलाल कसा के जंगलों में नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें धनुष भी शामिल था. इसके अलावा दोनों और भी नक्सली वारदातों में शामिल रहे लेकिन आखिरकार उन्होंने सरेंडर किया. उनका कहना है कि अब सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. दोनों नक्सली सीसी मेंबर रामदेर के साथ बालाघाट आए थे. वह जनवरी 2025 से एमएमसी में सक्रिय थे. उनकी पूरी टीम में रामदेर के अलावा 15 नक्सली शामिल थे, जिसमें लख्खे मरावी रौंदा एनकाउंटर में मारी गई. सुनीता ओयाम, धनुष, रोनी और तीन नक्सलियों ने सरेंडर किया. ऐसे में उसकी टीम आधी रह गई है.
फर्राटेदार अंग्रेजी और जबरदस्त टाइपिंग स्पीड
सरेंडर करने वाला नक्सली धनुष हिंदी और अंग्रेजी की अच्छी जानकारी रखता है. वहीं उसे कंप्यूटर और दूसरी चीजों का अच्छा ज्ञान है. वह संगठन में टेक्निकल काम देखता था. बालाघाट में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला ने बताया कि वह नक्सली साहित्य, प्रेस नोट और मैगजीन प्रभात के लिए कंटेंट राइटिंग करता था. धनुष की पत्नी रोनी उर्फ तुले सीसी मेंबर रामदेर के साथ काम कर चुकी है.
बताते चलें कि एमएमसी जोन (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) में तीनों राज्यों का संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है. ऐसे में नक्सलियों पर काफी दबाव है. अब उन्होंने खुद ही एक प्रेस नोट जारी कर सरेंडर करने की बात कही है. पहले तो उन्होंने सरेंडर करने के लिए 15 फरवरी तक वक्त मांगा था लेकिन अब नए प्रेस नोट के मुताबिक उन्होंने 1 जनवरी 2026 को ही सरेंडर करने की बात कही है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.