रिपोर्ट: शिवेंद्र सिंह
Rewa News: मध्य प्रदेश से उठा ‘ब्राह्मण की बेटी’ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने भी एक पत्र लिख दिया है. उन्होंने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (अजाक्स) के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. सांसद ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है. बता दें, IAS द्वारा ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए अशोभनीय बयान ने पूरे राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है. अब यह मामला प्रमोशन तथा चयन प्रक्रिया की जांच तक पहुंच गया है.
पत्र में सांसद ने संतोष वर्मा के भोपाल के अंबेडकर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में दिए बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा, “जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न दे दे या उससे संबंध न बनाए, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए.” सांसद ने इस बयान को अपमानजनक, जातिगत विद्वेष फैलाने वाली, लैंगिक रूप से संवेदनशील और प्रधानमंत्री के महिला सशक्तीकरण अभियान के विरुद्ध बताया. उन्होंने कहा कि यह बयान अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत वर्मा के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए.
MPPSC से IAS में प्रमोट
सांसद ने वर्मा के प्रमोशन पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्मा मूल रूप से अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के हैं, लेकिन IAS में चयन और पदोन्नति के लिए खुद को अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग का बताकर लाभ लिया. मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा (एमपीएससी) से आईएएस में प्रमोट होने के बावजूद, उनके चयन की प्रक्रिया पर जांच की मांग की गई. सांसद ने कहा, यदि प्रमोशन में अनियमितता पाई जाती है तो वर्मा को डिमोट किया जाए.
मामला अदालत में, फिर कैसे मिला प्रमोशन?
इसके अलावा, सांसद ने वर्मा के पुराने आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया. 2021 में एक महिला के साथ मारपीट और अश्लील शब्दों के इस्तेमाल के आरोप में वर्मा पर मुकदमा दर्ज हुआ था. उन्होंने फर्जी राजीनामा पेश कर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया. यह मामला अब भी अदालत में लंबित है, फिर भी प्रमोशन दे दिया गया, जो प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल खड़े करता है.
सांसद ने पत्र में मंत्री से अपील की कि वर्मा के बयान और पूर्व आरोपों की तत्काल जांच हो तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप कार्रवाई की जाए. सांसद ने कहा, “ऐसे बयान संविधान की भावना के विरुद्ध हैं. अधिकारी को जवाबदेह बनाना जरूरी है.” यह घटना मध्य प्रदेश की राजनीति में जातिगत तनाव को नई ऊंचाई दे रही है, जहां आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे बार-बार उभर रहे हैं. केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है.