Last Updated:
Palak Ki Kheti Se Kamaee: पालक एक ऐसी फसल है. जिसे किसान कम लागत में लगाकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इनके अनुसार पालक में आयरन भरपूर होता है और लोग सर्दियों में हरी पत्तेदार सब्ज़ियों को ज्यादा पसंद करते हैं. इस फसल की खपत तेज रहती है
आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी फसल की, जो सर्दियों के मौसम में किसानों की जेब भरने का काम करती पालक है. वैसे तो पालक की खेती सालभर की जा सकती है. दिसंबर का महीना इस फसल के लिए सबसे शानदार माना जाता है. ठंडे मौसम में पालक की पत्तियाँ मोटी, हरी और चमकदार बनती हैं. बाज़ार में भी इस समय इसकी मांग सबसे ज़्यादा रहती है. यही वजह है कि खेती विशेषज्ञ भी दिसंबर में पालक लगाने की सलाह देते हैं.
जय कृषि किसान क्लीनिक के नवनीत रेवापाटी बताते हैं कि पालक एक ऐसी फसल है. जिसे किसान कम लागत में लगाकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इनके अनुसार पालक में आयरन भरपूर होता है और लोग सर्दियों में हरी पत्तेदार सब्ज़ियों को ज्यादा पसंद करते हैं. इस फसल की खपत तेज रहती है और किसान की उपज तुरंत बिक जाती है.नवनीत बताते हैं कि पालक की सबसे बड़ी खासियत है.यह सिर्फ 35 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है. प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसान यह फसल लगा भी रहे हैं. उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है.
खेत की तैयारी कैसे करें
पालक की फसल ज्यादा मेहनत नहीं मांगती, लेकिन शुरुआत में अगर खेत की तैयारी अच्छे से की जाए, तो पैदावार दोगुनी हो सकती है. इसके लिए पहले खेत की गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बना लें. पालक को हल्की दोमट और उपजाऊ मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद होती है.बुआई से पहले खेत में अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डाल देना बहुत जरूरी है. इससे मिट्टी नरम रहती है और पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं. रासायनिक खाद की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है. यही वजह है कि इसकी लागत भी कम आती है.
कौन सी किस्म चुनें
आजकल बाजार में पालक की कई तेजी से बढ़ने वाली वैरायटी उपलब्ध हैं. किसानों के अनुसार कुछ नई किस्में तो ऐसी विकसित हुई हैं जो जल्दी उत्पादन देती हैं और पत्तियाँ ज्यादा आती हैं. आप चाहे तो स्थानीय कृषि केंद्र से सलाह लेकर अपने इलाके के हिसाब से किस्म चुन सकते हैं.
बुआई कैसे करें
पालक के बीज छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें हल्की नमी वाली मिट्टी में बोना चाहिए. बीज को बहुत गहराई में नहीं डालें। हल्का सा दबाकर ऊपर से सिंचाई कर दें. दिसंबर में ठंड ज्यादा रहती है इसलिए दिन में हल्की सिंचाई करते रहें ताकि जमीन में नमी बनी रहे.
सिंचाई और देखभाल
पालक को ज्यादा पानी नहीं चाहिए। बस इतना ध्यान रखें कि मिट्टी सूखने न पाए. हर 4–5 दिन में हल्की सिंचाई करते रहें. पालक पर रोग–कीट भी बहुत कम लगते हैं. इसलिए दवाई भी कम लगती है और लागत काफी कम हो जाती है.अगर खेत में खरपतवार ज्यादा हैं तो 15–20 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई कर दें. इससे पौधे खुलकर बढ़ेंगे और पत्तियाँ चौड़ी होंगी.
कटाई कब और कैसे
पालक की फसल 35–40 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. पहचान बहुत आसान है—जब पत्तियाँ मोटी, बड़ी और चमकदार लगने लगें, तब कटाई कर लें.किसान चाहें तो पूरी फसल एक बार में काट सकते हैं, या जरूरत के अनुसार ऊपर का हिस्सा काटकर दोबारा भी बढ़ने दे सकते हैं. यह तरीका कई बार ज्यादा लाभ देता है क्योंकि एक ही खेत से कई कटिंग मिल जाती हैं.