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Agriculture News: सागर जिले के गढ़ाकोटा का इलाका टमाटर की खेती के लिए पहचाना जाता है. यहां कई गांव में किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर कई साल पहले ही सब्जियों की खेती शुरू कर चुके हैं. इसमें टमाटर बैंगन मिर्च शिमला मिर्च गोभी आलू प्याज जैसी फसले शामिल है.
समय के साथ किसान भी आधुनिक होते जा रहे हैं नई-नई तकनीक अपना कर बे अपना मुनाफा तो बड़ा ही रहे हैं लेकिन खेती के स्मार्ट तरीका को भी अपना रहे हैं

ऐसे ही माधौ गांव के नारायण सिंह लोधी के पास करीब ढाई एकड़ जगह है. जिसमें वह 8-10 साल से सब्जियों की खेती कर रहे हैं लेकिन सीधी साधारण खेती करने से मुनाफा तो होता था लेकिन बीमारियां बहुत लगती थी. खरपतवार की वजह से भी नुकसान होता था.

इस साल उन्होंने पहली बार ड्रिप मल्चिंग तकनीक को अपनाकर टमाटर की खेती आधा एकड़ में लगाई थी साथ ही हाइब्रिड शंकर प्रजाति का बीज बाहर से मंगवाया, नर्सरी लगाकर पौधे तैयार की
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इधर खेत की अच्छी से तैयारी कर बहुत तैयार होने के बाद ट्रांसप्लांट किया गया 55 दिन में ही टमाटर में फल आने लगे और अब तक 17 तुड़ाई कर चुके हैं, इस बार सबसे अधिक चित्रकूट उन का टमाटर आया है और भाव भी₹50 किलो तक मिले हैं चार दिन पहले भी उन्हें 48 रुपया किलो तक के भाव मिले लेकिन पिछले तीन-चार दिन से लगातार टमाटर के दाम कम हो रहे हैं और अब यह 30 रुपया किलो पर आ गया है.

नारायण लोधी ने बताया कि ड्रिप मल्चिंग पद्धति सिर्फ खेती करने में एक तो पानी की बचत सीधी होती है दूसरा खरपतवार काम होता है जिससे रासायनिक दवा का छिड़काव फसल पर कम होता है.

ड्रिप मल्चिंग पर खेती करने से इस बार ब्लैक ब्लाइट रोग भी काम लगा है बुंदेलखंड में से झुलसा भी कहते हैं जिसमें पेड़ की पत्तियां सूख जाती हैं फलन कम हो जाता है.

सागर जिले का चनौआ पिछले 20- 25 सालों से टमाटर की खेती के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां से यूपी छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र दिल्ली राजस्थान तक टमाटर की सप्लाई होती है. लेकिन अब इसके आसपास के गांव में भी किसान टमाटर की खेती करने लगे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे.

आलू और टमाटर ऐसी सब्जियां होती हैं. जिनकी 12 महीने डिमांड होती है और इनके भाव में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहता है.