Bagai Makhi. छतरपुर जिले में एक ऐसी भी मक्खी पाई जाती है, जो पशुओं के लिए दुश्मन मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में इस मक्खी को बगई कहा जाता है. ये मक्खी पशुओं में बैठते ही उनका खून चूसने लगती है.
छुट्टन पाल बताते हैं कि हमारे यहां एक ऐसी भी जंगली मक्खी पाई जाती है जो हमारे पशुओं के लिए दुश्मन होती है. क्योंकि यह मक्खी हमारे पशुओं का खून चूसती है. पशुओं के पीछे एक मक्खी नहीं बल्कि सैकड़ो की तादाद में ये मक्खियां पीछे लग जाती हैं और जब यह पशु हार-खेत से घर आते हैं तो भी पशुओं का पीछा नहीं छोड़ती हैं. फिर इन मक्खियों को हम घंटों मारते रहते हैं क्योंकि हमारे पास इसका कोई उपाय नहीं है.
गाय-भैंसों के ही पीछे पड़ती है
छुट्टन बताते हैं कि यह मक्खियां गाय-भैंसों को ही परेशान करती हैं. इन्हीं के पीछे पड़ती हैं. भेड़-बकरियों के पीछे यह मक्खियां नहीं लगती हैं. गाय भैंसों को ही ज्यादा लगती हैं, भेड़ बकरियों को परेशान नहीं करती हैं.
मच्छर से भी ज्यादा खतरनाक होती है
युवा बताते हैं कि इस मक्खी को क्षेत्रीय भाषा में बगई कहा जाता है. यह सामान्य तौर पर छोटी मक्खियों से बड़ी होती है. यह मक्खी मच्छर से ज्यादा खतरनाक होती है. मच्छर भी खून चूसता है लेकिन यह मक्खी मच्छर से कई गुना तेजी से खून चूसती है.
तेजी से पशुओं का खून चूसती है
युवा बताते हैं कि ये मक्खियां जैसे ही पशुओं के शरीर में बैठती हैं तुरंत खून चूसने लगती हैं. ये साइज़ में सामान्य मक्खी से बड़ी होती है. ये मक्खी सुई जैसी बाइट करती है. जैसे ही ये बाइट करती है तुरंत खून निकलना शुरू हो जाता है.
दूध घट जाता है
युवा बताते हैं कि इस मक्खी के काटने से पशुओं को दर्द तो होता ही है, असहनीय पीड़ा भी होती है लेकिन इससे वह कमजोर हो जाते हैं और उनके दूध देने की क्षमता भी घट जाती है.
मारने के अलावा नहीं कोई उपाय
छुट्टन बताते हैं कि पशुओं की मक्खियों को हम घंटे मारते रहते हैं हमें इसका कोई उपाय नहीं मिला है. हम पशु अस्पताल भी गए लेकिन कुछ खास इसकी दवा नहीं मिली, जो मक्खियों से हमारे पशुओं को बचा पाए. इन मक्खियों का यही सॉल्यूशन है कि इन्हें हमें मारना पड़ता है.
वहीं लवकुश नगर पशु चिकित्सा अधिकारी मातादीन पटेल बताते हैं कि यह मक्खी हार-खेत, जंगल में पाई जाती है. अगर जानवर वहां चरने जाता है तो उसके पीछे-पीछे घर तक आ जाती हैं. इसका उपाय हमारे पास भी कुछ खास नहीं है. हालांकि, कुछ तेल आते हैं जिसकी तेज महक से कुछ हद तक पास नहीं आ सकती हैं लेकिन ये मक्खी ढीढ होती है. आसानी से नहीं भगती है.