बैतूल की ‘भरेवा कला’ को मिला GI टैग! अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेगी पंचधातु की अद्भुत विरासत, जानें सबकुछ

बैतूल की ‘भरेवा कला’ को मिला GI टैग! अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेगी पंचधातु की अद्भुत विरासत, जानें सबकुछ


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Betul News: बैतूल की पारंपरिक भरेवा धातु शिल्पकला को भारत सरकार ने GI टैग प्रदान किया है. पंचधातु से बनी इस अनूठी कला की प्रसिद्ध ‘मोरचिमनी’ देश-विदेश में लोकप्रिय है. प्रधानमंत्री को भी इसकी कलाकृति भेंट की जा चुकी है. GI टैग मिलने से इसकी मौलिकता सुरक्षित होगी और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नए अवसर मिलेंगे.

बैतूल की ‘भरेवा कला’ को मिला GI टैग!

रिपोर्ट- रिशु कुमार नायडू

बैतूल. बैतूल जिले की पारंपरिक और प्राचीन कला भरेवा धातु शिल्पकला को अब भारत सरकार की ओर से जीआई टैग मिल गया है. चेन्नई स्थित बौद्धिक संपदा अधिकार (जीआई रजिस्ट्री) ने इस अनोखी कला को जीआई टैग प्रदान किया है. इसके साथ ही यह कला अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना चुकी है.

भरेवा धातु शिल्पकला बैतूल की एक बेहद पुरानी और अनोखी कला है. इस कला में पंचधातुओं का उपयोग किया जाता है. पाँच अलग-अलग धातुओं को पिघलाकर उनसे आकर्षक और बारीक शिल्प तैयार किए जाते हैं. धातुओं के इस विशेष मिश्रण और कलाकारों की कुशलता से तैयार की गई कलाकृतियाँ अपनी खूबसूरती और मजबूती के लिए विख्यात हैं.

भरेवा कला की सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध कलाकृतियों में से एक है ‘मोरचिमनी’. यह कलाकृति न केवल बैतूल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है. इसकी सुंदरता और बारीक डिजाइन देखते ही बनती है. इसी वर्ष मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भरेवा कला से बनी एक विशेष मोर की कलाकृति भेंट की गई थी. यह कलाकृति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर स्वयं प्रधानमंत्री को सौंपकर बैतूल की इस परंपरागत कला को राष्ट्रीय मंच पर गौरव दिलाया था. इस सम्मान के बाद भरेवा कला की चर्चा देशभर में और अधिक बढ़ गई.

अब जीआई टैग मिलने के बाद भरेवा धातु शिल्पकला के महत्व में और वृद्धि हुई है. जीआई टैग का मतलब है कि यह कला केवल बैतूल की ही है और इसकी मौलिकता प्रमाणित है. इससे जुड़े कलाकारों और कारीगरों को अब अपने काम को दुनिया के सामने रखने के नए अवसर मिलेंगे. सरकार और विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से अब इन कलाकृतियों को निर्यात और विपणन की अधिक सुविधाएँ मिल सकेंगी. जीआई टैग मिलने के बाद यह भी संभव होगा कि देश के प्रधानमंत्री, राजदूत और अन्य उच्च अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरेवा धातु शिल्प से बनी इन विशेष कलाकृतियों को औपचारिक उपहार के रूप में दुनिया के विभिन्न देशों को भेंट कर सकेंगे. इससे भारत की सांस्कृतिक धरोहर और कारीगरों की प्रतिभा का प्रचार-प्रसार और अधिक बढ़ेगा.

भरेवा धातु शिल्पकला के साथ-साथ देश की अन्य 5 शिल्पकलाओं को भी इस वर्ष जीआई टैग प्रदान किया गया है. यह कदम भारत की पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रयास है.इस प्रकार, भरेवा धातु शिल्पकला अब केवल एक स्थानीय कला न होकर विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय धरोहर बन चुकी है.

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Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें

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