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मध्य प्रदेश की फेमस पर्सनालिटीज़ की बात हो और जबलपुर के एक छोटे से गांव से आने वाले अंकित सेन की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. जी हां, वही अंकित सेन जिन्हें मध्य प्रदेश का ‘माउंटेन मैन कहा जाता है.’ वह 7 महाद्वीपों में से तीन महाद्वीपों पर तिरंगा फहरा चुके हैं.
अंकित सेन प्रतियोगी परीक्षाओं के सवाल बन चुके हैं. एमपीपीएससी से लेकर कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों में अंकित से जुड़ा यह सवाल शुमार हो चुका है. कोचिंग इंस्टीट्यूट में टीचर यह सवाल परीक्षार्थियों को पढ़ा रहे हैं.

अंकित सेन जबलपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर मझौली के एक छोटे से गांव से आते हैं. उनकी उम्र 26 साल है. वह अभी तक 7 महाद्वीपों में से तीन महाद्वीपों पर तिरंगा फहरा चुके हैं.

इसमें अफ्रीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप शामिल हैं. अंकित का अगला लक्ष्य बाकी बचे चार महाद्वीपों पर भारत का झंडा फहराना है.
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‘माउंटेन मैन’ अंकित सेन के पिता किसान हैं और उनकी मां गृहिणी हैं. अंकित की शुरुआती ट्रेनिंग एनसीसी के जरिए हुई थी. जिसके बाद उन्होंने ऊंची चोटियों पर चढ़ना जारी रखा. आज वह मध्य प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं.

इतना ही नहीं, अंकित अब उन गरीब बच्चों को भी ट्रेकिंग सिखा रहे हैं, जिनके पास पैसों का अभाव है. अंकित 100 से ज्यादा ऐसे बच्चों को पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं.

अंकित का कहना है कि लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए और लक्ष्य के पीछे तब तक भागना चाहिए, जब तक वह हासिल नहीं हो जाता. वह कहते हैं कि जीवन में परेशानियां आती हैं लेकिन उन परेशानियों को पीछे छोड़ जो आगे बढ़ गया, समझो वह सफल हो गया.

अंकित ने कहा कि क्लाइंबिंग करना आसान नहीं है. इसके लिए काफी प्रैक्टिस की जरूरत होती है. माइनस डिग्री टेंपरेचर होने के बावजूद भी लक्ष्य हासिल करना होता है. शुरुआत में इसके लिए भारत में ही प्रैक्टिस की जरूरत होती है.