देश में इकलौता स्थान, जहां हर सुबह 20 फीट नीचे उतरती है सूरज की पहली किरण

देश में इकलौता स्थान, जहां हर सुबह 20 फीट नीचे उतरती है सूरज की पहली किरण


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General Knowledge: यहां सूर्य देव को धरातल से लगभग 20 फीट नीचे गर्भगृह में स्थापित किया गया है. मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सात सीढ़ियां दिखाई देती हैं, जो सप्ताह के 7 दिनों का प्रतीक है. गर्भगृह में उतरने के लिए 12 सीढ़ियां हैं जो 12 राशियों का संकेत देती हैं. वहीं गर्भगृह से ऊपर लौटते समय फिर 12 सीढ़ियां, जो 12 महीनों को दर्शाती हैं.

दीपक पांडेय/खरगोन.क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां सूरज की पहली किरण धरातल से करीब 20 फीट नीचे जाकर गर्भगृह को रोशन करती है? बिल्कुल विज्ञान और ज्योतिष के कमाल से बना यह देश का इकलौता सूर्यप्रधान नवग्रह मंदिर खरगोन जिले में मौजूद है. इसी वजह से खरगोन को नवग्रह की नगरी भी कहा जाता है.

खरगोन में कुंदा नदी के तट पर बना यह प्राचीन मंदिर वास्तुकला, गणित और ज्योतिष शास्त्र का अनोखा संगम है. करीब 300 साल पुराने इस मंदिर को नौ ग्रह, 12 राशियां, 12 महीने और 7 दिनों के आधार पर डिज़ाइन किया गया है. इसकी पूरी संरचना ऐसी बनाई गई है कि सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भगृह तक पहुंचे.

धरातल से लगभग 20 फीट नीचे गर्भगृह
यहां सूर्य देव को धरातल से लगभग 20 फीट नीचे गर्भगृह में स्थापित किया गया है. मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सात सीढ़ियां दिखाई देती हैं, जो सप्ताह के 7 दिनों का प्रतीक है. गर्भगृह में उतरने के लिए 12 सीढ़ियां हैं जो 12 राशियों का संकेत देती हैं. वहीं गर्भगृह से ऊपर लौटते समय फिर 12 सीढ़ियां, जो 12 महीनों को दर्शाती हैं. मंदिर में मां बगलामुखी की स्थापना होने से इसे पीतांबरी गृहशांति मंदिर भी कहा जाता है. गर्भगृह में ब्रह्मास्त्र और सूर्यचक्र के रूप में दो महाशक्तियां भी स्थापित हैं, जिनकी मान्यता बेहद प्राचीन और चमत्कारिक मानी जाती है.

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
मंदिर के आचार्य लोकेश जागीरदार बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण उनके पूर्वज शेषप्पा ने कराया था. मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों से संबंधित बाधाएं हों, वह यहां संबंधित ग्रह का दान करे तो उसकी समस्याएं दूर हो जाती हैं. मंदिर में सभी नौ ग्रहों की मूर्तियां काले पत्थरों से बनी हैं, जिनमें प्रत्येक ग्रह को उसकी सवारी, ग्रह मंडल, ग्रह रत्न, ग्रह यंत्र और शस्त्रों के साथ स्थापित किया गया है. मंदिर के तीन शिखर त्रिदेव—ब्रह्म, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं, जो न सिर्फ इसकी आध्यात्मिक महिमा को और मजबूत करते हैं बल्कि, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है.

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Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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