अपराधी प्राचार्य शकुंतला शंखवार।
झाबुआ जिले में भ्रष्टाचार के एक मामले में कोर्ट ने तत्कालीन प्राचार्य शकुंतला शंखवार को दोषी ठहराते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। उन्हें बिलों के भुगतान के बदले 40 प्रतिशत कमीशन मांगने का दोषी पाया गया। अदालत ने उन पर 5000-5000 र
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शंखवार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झकनावदा की तत्कालीन प्राचार्य थीं और साथ ही पेटलावद की बीईओ (ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) का प्रभार भी संभाल रही थीं। उप निदेशक अभियोजन, झबरसिंह मुवेल ने बताया कि यह निर्णय 4 दिसंबर 2025 को पारित किया गया। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13(1)डी सहपठित धारा 13(2) के तहत दंडित किया गया है।
विकास खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय।
लोकायुक्त पुलिस में की थी शिकायत
मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर 2017 को हुई थी, जब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झकनावदा के जनशिक्षक/अध्यापक पूनमचंद्र कोठारी ने विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
कोठारी को पता चला था कि 65,000 रुपए के पुराने बिलों का भुगतान लंबित है। पूर्व सचिव महेंद्र शर्मा ने उन्हें बताया था कि प्राचार्य शकुंतला शंखवार लंबित बिलों पर हस्ताक्षर करने के लिए कमीशन की मांग कर रही हैं। बाद में, 40,000 रुपए के बिलों के भुगतान के संबंध में प्राचार्य ने 40 प्रतिशत कमीशन, यानी 16,000 रुपए की मांग की।
पूनमचंद्र कोठारी ने रिश्वत देने के बजाय लोकायुक्त से संपर्क किया। शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया। रिकॉर्डिंग में प्राचार्य द्वारा 40,000 रुपए का 40 प्रतिशत यानी 16,000 रुपए कमीशन मांगना स्पष्ट हुआ। हालांकि, चूंकि आवेदक पहले 17,500 रुपए की जगह 20,000 रुपए दे चुके थे, इसलिए प्राचार्य ने बकाया 13,500 रुपए लेना तय किया।

तत्कालीन प्राचार्य शकुंतला शंखवार।
13500 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था
दिनांक 1 नवंबर 2017 को आरोपी शकुंतला शंखवार को पेटलावद के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में 13,500 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। रिश्वत की राशि उनके स्लेटी रंग के हैंडबैग से बरामद की गई। अभियोजन पक्ष ने मामले को प्रमाणित करने के लिए न्यायालय में कुल आठ गवाहों की गवाही प्रस्तुत की। मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह अपराध साबित हुआ।
न्यायालय ने अभियोजन के महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर विश्वास करते हुए मामले को प्रमाणित माना और दंड का आदेश पारित किया। आरोपी को जेल वारंट बनाकर जेल भेज दिया गया है। इस प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी महेश पटेल और विशेष लोक अभियोजक राजेंद्रपाल सिंह अलावा ने की।