भिंड जिले की फूप थाना पुलिस इन दिनों विवादों से घिरी है। कारण है कि बीते 21 नवंबर को एक साधारण से एक्सीडेंट में पुलिस ने ज्यादा रुचि दिखाई। एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर एक के बाद एक तीन एफआईआर दर्ज की। इन सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।
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मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। न्यायालय के आदेशानुसार अबिलंव मेडिकल चैकअप पैनल बोर्ड से होना था। न्यायालय के आदेश के बाद भी आरोपियों का मेडिकल चैकअप न होने के कारण अब जिला न्यायालय सख्त हो गया है। जिला कोर्ट ने फूप थाना टीआई सतेंद्र राजपूत व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जेएस यादव को कारण बताओ नोटिस थमाया है। जबाव दो दिनों में देने के आदेश थे, समय सीमा खत्म होने के चलते आज (शुक्रवार) जवाब देना होगा।
यह था मामला दरअसल, मामला यह था कि बीते 21 नवंबर शुक्रवार की शाम को फूप कस्बे के सैनिक कॉलोनी निवासी विवेक शर्मा सब्जी खरीदने के लिए ठेले पर खड़ा था। उसी समय छोटू जाटव बाइक से आया। उसकी बाइक विवेक से टकरा गई। दोनों गिर पड़े। विवेक और उसके परिजन ने छोटू के साथ मारपीट कर दी। विवाद बढ़ा तो सड़क पर जाम लग गया।
सूचना पर सादी वर्दी में पुलिस जवान राहुल राजावत मौके पर पहुंचे। बीच-बचाव के दौरान विवेक वाले पक्ष की राहुल से भी बहस हो गई। मौके पर मौजूद दीपक परमार ने घटना का वीडियो बनाना चाहा, तो विवेक पक्ष ने उसका मोबाइल भी छीन लिया। पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया। क्रॉस FIR दर्ज कर ली।
रात में घर से उठाकर लाने का आरोप इसके बाद रात को पुलिस, विवेक के घर पहुंची। कई सदस्यों को थाने ले आई। बाद में महिलाओं-बच्चों को छोड़ दिया, लेकिन विवेक शर्मा, प्रमोद शर्मा, अभिषेक शर्मा, दीपक शर्मा और सुरेश शर्मा को रातभर हवालात में रखा गया था। आरोप यह भी था कि पुलिस ने हवालात में पांचों के साथ जमकर मारपीट की, जिससे प्रमोद और दीपक को गंभीर चोटें आई थीं।
22 नवंबर को कोर्ट से बाहर निकलते तो चलने में असमर्थ दिखाई दिए थे।
कोर्ट के आदेश को रखा ताक पर यह मामला शुक्रवार का था, पुलिस ने शनिवार यानी 22 नवंबर को पांचों लोगों को कोर्ट के सामने पेश किया। यहां आरोपियों की हालत बेहद खराब दिख रही थी। प्रमोद और दीपक चल भी नहीं पा रहे थे। प्रमोद ने अदालत को बताया कि हवालात में लाठी-डंडों से पिटाई की गई है। मेडिकल रिपोर्ट में भी प्रमोद के शरीर पर 11 गंभीर चोटों की में बात लिखी थी।
इसके मद्देनजर जज ने पुलिस द्वारा कराए गए मेडिकल चेकअप की रिपोर्ट को अमान्य मानते हुए पैनल बोर्ड से दोबारा मेडिकल कराने के निर्देश दिए। सभी को जमानत भी दे दी थी । इसके बाद फूप पुलिस पूरे मामले को लेकर टेंशन में थी। अबिलंव मेडिकल कराए जाने को लेकर फूप थाना पुलिस द्वारा जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क किया।
इस दौरान 2 दिसंबर को पैनल से मेडिकल कराए जाना स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिखा गया। लेकिन हड्डी विशेषज्ञ के अवकाश पर जाने की बात कहकर स्वास्थ्य विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया। न्यायालय के आदेश के बाद मेडिकल चैकअप नहीं हो सका। अब इस मामले में कोर्ट ने ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जेएस यादव व फूप टीआई को नोटिस 3 दिसंबर को कोर्ट ने थमाए, जिसका जबाव दो दिन यानी आज दोनों अधिकारियों को पेश करना होगा।
हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉ यादव से चर्चा करना चाही। दो बार फोन पर संपर्क करना चाहा लेकिन उनका मोबाइल रिसीव नहीं हो सका। वहीं पूरे प्रकरण में अटेर एसडीओपी रविंद वास्कले का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा।