1 गेंद के खिलाफ 30 बार जंग हार चुके है जायसवाल, कैसे हो रहा है सस्ते में शिकार

1 गेंद के खिलाफ 30 बार जंग हार चुके है जायसवाल, कैसे हो रहा है सस्ते में शिकार


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यशस्वी जायसवाल को बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों के खिलाफ जूझना पड़ रहा है फिर चाहे वह वेस्टइंडीज के जेडन सील्स हों या इस श्रृंखला में मार्को यानसन और नांद्रे बर्गर. वह अपने करियर में 30 बार बाएं हाथ के गेंदबाजों का शिकार बने हैं. यानि विशाकापट्टनम में फिर यानसन और बर्गर बड़ा खतरा साबित हो सकते है.

ओपनर यशस्वी जायसवाल अपने करियर में 30 बार हो चुके हैं बाएं हाथ के गेंदबाजों का शिकार

नई दिल्ली. टेस्ट सीरीज हारने वाली टीम इंडिया पर अब वनडे सीरीज हारने का खतरा भी मंडराने लगा है और ऐसे में टीम मैनेजमेंट टीम के हर खिलाड़ी से बड़ा योगदान चाहती है. खास तौर पर युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल से. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में  भारत के कुछ युवा खिलाड़ी अभी तक अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और ऐसे में उन पर दबाव होगा.

दक्षिण अफ्रीका टेस्ट श्रृंखला जीतने के बाद अब वनडे श्रृंखला जीतने में भी कसर नहीं छोड़ेगा और ऐसे में भारतीय टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की जरूरत है. कुछ युवा बल्लेबाजों का अच्छा सहयोग मिल रहा है जैसा कि पिछले मैच में रुतुराज गायकवाड़ ने अपना योगदान दिया था. उन्होंने अपना पहला वनडे शतक लगाया था लेकिन यशस्वी जायसवाल को अभी भी इस श्रृंखला में सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन करना बाकी है. यह प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने के लिए उत्सुक होगा.

जायसवाल को बाएं हाथ के फोबिया से निकलना जरूरी

रेड बॉल हो या व्हाइट बॉल एक बात तो साफ हो चुकी है कि यशस्वी जायसवाल को बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों के खिलाफ जूझना पड़ रहा है फिर चाहे वह वेस्टइंडीज के जेडन सील्स हों या इस श्रृंखला में मार्को यानसन और नांद्रे बर्गर. वह अपने करियर में 30 बार बाएं हाथ के गेंदबाजों का शिकार बने हैं. यानि विशाकापट्टनम में फिर यानसन और बर्गर बड़ा खतरा साबित हो सकते है. जायसवाल और टीम प्रबंधन इससे अनजान नहीं रह सकते और इसमें सुधार करने का काम शायद पहले ही शुरू हो चुका है लेकिन अगर वह सुधार नहीं कर पाए तो टीम को अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है.  टीम के पास गायकवाड़ के रूप में एक अदद सलामी बल्लेबाज मौजूद है.

पिच बढ़ाएगी यशस्वी का विश्वास 

एसीए-वीडीसीए स्टेडियम की पिच अक्सर बल्लेबाजों के अनुकूल होती है और भारत का यहां शानदार रिकॉर्ड रहा है. ये बात यशस्वी जायसवाल के फॉर्म को वापस लाने में मदद कर सकती है.  भारतीय टीम के लिए भी ये मैदान लकी रहा है . यहां 2005 से 10 एकदिवसीय मैचों में से सात में जीत हासिल की है लेकिन यहां खेले गए पिछले मैच में उसे आस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा था. इस श्रृंखला में ओस के कारण टॉस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है.  भारत वनडे में पिछले 20 मैच से टॉस नहीं जीत पाया है जिसका खामियाजा उसे रायपुर में दूसरे वनडे में भुगतना पड़ा. भारत वाशिंगटन सुंदर को विश्राम देकर उनकी जगह तिलक वर्मा को मध्यक्रम की बल्लेबाजी को मजबूत करने के लिए अंतिम एकादश में शामिल करने पर भी गंभीरता से विचार करेगा. ऋषभ पंत भी एक विकल्प हो सकते हैं लेकिन तिलक स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते हैं और वह बेहतरीन क्षेत्ररक्षक के भी हैं.

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