अब खुल रहे नक्सलियों के राज, बालाघाट के जंगल में मिला मिनी अस्पताल, दवाओं का जखीरा, जानें कौन था डॉक्टर?

अब खुल रहे नक्सलियों के राज, बालाघाट के जंगल में मिला मिनी अस्पताल, दवाओं का जखीरा, जानें कौन था डॉक्टर?


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Balaghat News: मुठभेड़ में जब नक्सली घायल होते थे, तो उनका इलाज जंगल में ही हो जाता था. वे फिर ठीक होकर एक्टिव हो जाते थे. इस बात का खुलास तब हुआ जब सुरक्षाबलों को जंगल में मिनी अस्पताल मिला. जानें नक्सलियों के राज…

Balaghat News: 1967 में शुरु हुई सशस्त्र क्रांति अब खत्म होने की कगार पर है. दरअसल, केंद्र सरकार ने माओवाद को खत्म करने के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय कर दी है. सुरक्षाबलों के एंटी नक्सल ऑपरेशन तेज हो गए हैं. ऐसे में नक्सली अपनी जान बचाने की लिए इधर से उधर भाग रहे हैं. कुछ नक्सली मारे गए, तो कुछ ने सरेंडर कर दिया. जैसे-जैसे माओवादी कमजोर हो रहे हैं, उनके ठिकाने और तरीके सामने आ रहे हैं. वे किस तरह जंगल में रहते थे? पुलिस के खिलाफ कैसे रणनीति तैयार करते थे? सबकुछ पता चल रहा है.

हाल ही में बालाघाट के अली टोला और मोजाडोरा के जंगलों में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के ठिकाने से हथियार तो मिले ही, साथ में बड़ी संख्या में दवा का जखीरा मिला. इससे साफ जाहिर हो गया कि जंगल में नक्सलियों का मिनी अस्पताल भी था. नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई में कई-कई बार तो नक्सली मारे जाते हैं. कुछ गंभीर रूप से घायल भी होते हैं. दरअसल, मुठभेड़ के बाद पुलिस अपनी सर्चिंग तेज कर देती है. इससे नक्सली के लिए गांवों की तरफ आना मतलब अपनी जान से हाथ धोने जैसा होता है.

ऐसे में ये घायल नक्सलियों का इलाज इन्हीं अस्पतालों में होता था. हाल के दिनों में सुरक्षा बलों को एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत सघन सर्चिंग के दौरान किरनापुर थाना क्षेत्र के सिरका-मोजाडोरा और अलीटोला के जंगलों में नक्सली में दो ठिकाने डंप मिले. इसमें उन्हें विस्फोटक पदार्थ, कारतूस सहित कई चीजें मिली. इसी में दवा का जखीरा भी मिला. इसमें पेन किलर, इंजेक्शन, बुखार, आईवी सेट्स, ओआरएस, विटामिन की टेबलेट सहित कई चीजें थीं.

खुद ही करते इलाज
एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला ने बताया, मुठभेड़ के बाद उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर तक पहुंचना मुश्किल होता है. ऐसे में तमाम दवाइयां अपने पास ही रखते हैं, जिससे वह प्राथमिक उपचार खुद ही कर सकें. ऐसे में नक्सली अपने साथ दवा का जखीरा भी रखते हैं. वहीं, डंप रखी दवा का भी इस्तेमाल करते हैं. इस तरह वह अपना इलाज करते हैं. नक्सल दल में कुछ नक्सली डॉक्टरी का काम करते हैं, जो घायल नक्सलियों का इलाज भी करते हैं. हाल ही में अनंत उर्फ विकास नागपुरे ने सरेंडर किया, जिसमें संगीता भी शामिल हैं. वह दल में डॉक्टरी का काम करती थी.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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