दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पिछले दिनों दतिया से जिस विकास प्रजापति को गिरफ्तार किया है उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। विकास ने बताया कि वह पैसों के लालच में पंजाब के गुरुदासपुर के पुलिस थाने पर हैंडग्रेनेड फेंकने के लिए तैयार हो ग
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दरअसल, 25 नवंबर को पंजाब के गुरुदासपुर के सिटी थाने के बाहर एक जोरदार धमाका हुआ था। पंजाब पुलिस ने इसे टायर फटने की घटना बताया था, लेकिन आतंकी संगठन खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी (KLA) ने दावा किया कि यह ग्रेनेड अटैक था। खालिस्तान के खिलाफ बोलने पर यह हमला कराया गया था। आतंकी संगठन ने इसके साथ ग्रेनेड का वीडियो भी डाला था।
जब इस मामले की जांच हुई तो पता चला कि ये हमला पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी के इशारे पर किया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपी, पंजाब के हरगुनप्रीत सिंह, यूपी के आरिफ और एमपी के विकास प्रजापति को गिरफ्तार किया। विकास से पूछताछ में इस हमले की प्लानिंग का पता चला।
आखिर विकास शहजाद भट्टी के संपर्क में कैसे आया? उसने कैसे इस हमले को अंजाम दिया था? भास्कर ने उन अफसरों से बात की जिन्होंने विकास से पूछताछ की। पढ़िए रिपोर्ट….
अब जानिए कैसे विकास शहजाद भट्टी के संपर्क में आया
बेटी की शादी के लिए मकान बिका, परिवार गुजरात गया दतिया के इंदरगढ़ में रहने वाले विकास के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने एक छोटा सा मकान बनाया था। परिवार में विकास के अलावा उसकी एक बड़ी बहन थी। जब बहन की शादी की उम्र हुई, तो परिवार के पास कोई जमा-पूंजी नहीं थी। बेटी का घर बसाने के लिए उन्हें अपना बनाया हुआ मकान बेचना पड़ा।
यह विकास के लिए एक बड़ा झटका था। जिस घर को उसने अपनी आंखों के सामने बनते देखा था, उसे बिकते देख वह अंदर से टूट गया। घर बिकने के बाद परिवार के पास रहने का कोई ठिकाना नहीं बचा। उन्होंने फैसला किया कि वे बेहतर मजदूरी के लिए गुजरात जाएंगे, क्योंकि वहां कमाई ज्यादा थी। परिवार गुजरात चला तो गया, लेकिन विकास का मन वहां नहीं लगा।
वह कम उम्र से ही शराब का आदी हो चुका था और गुजरात में शराबबंदी के कारण उसका यह शौक पूरा नहीं हो पा रहा था। कुछ दिन माता-पिता के साथ मजदूरी करने के बाद वह अकेला ही दतिया लौट आया। यहां आकर वह पूरी तरह से दिशाहीन हो गया।

इंस्टाग्राम से आतंक की दुनिया तक का सफर विकास अपना ज्यादातर समय इंस्टाग्राम पर रील्स देखने में बिताता था। यहीं उसकी नजर कुछ ऐसे अकाउंट्स पर पड़ी, जहां युवक हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो डालते थे। उसे यह ‘दबंग’ छवि बहुत आकर्षित करती थी। उसने ऐसे ही एक शख्स को मैसेज करके पूछा, ‘क्या मुझे एक रिवॉल्वर मिल सकती है?’ उस शख्स ने जवाब दिया कि दिल्ली आ जाओ।
विकास ने किसी तरह कुछ रुपयों का इंतजाम किया और दिल्ली पहुंच गया। उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे पर बुलाया गया। वहां एक युवक आया और उसने 15,000 रुपए में विकास को एक रिवॉल्वर दी। विकास रिवॉल्वर लेकर दतिया लौटा और अगले ही दिन उसने इसे एक स्थानीय व्यक्ति को 20,000 रुपए में बेच दिया।
बिना किसी मेहनत के एक ही दिन में 5,000 रुपए का मुनाफा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गईं। उसे अपराध से होने वाली इस ‘आसान कमाई’ का चस्का लग गया।

विकास ने हथियारों की खरीद फरोख्त को ही अपना पेशा बनाने का फैसला कर लिया था।
पाकिस्तान से आया कॉल और ‘बड़ा काम’ का ऑफर हथियारों की छोटी-मोटी तस्करी के साथ-साथ विकास अब इंटरनेट पर बड़े गैंगस्टरों की दुनिया को और करीब से खंगालने लगा था। इसी दौरान वह पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी के नेटवर्क द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगंडा पेजों के संपर्क में आ गया। कुछ ही समय बाद, उसे एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज आया, ‘हमारे लिए काम करोगे? मोटा पैसा मिलेगा।’
विकास के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था। इसके बाद विदेशी हैंडलर के साथ उसकी वीडियो कॉलिंग का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ समय बाद, शहजाद भट्टी खुद वीडियो कॉल पर विकास से बात करने लगा। उसने विकास का भरोसा जीत लिया और उसे एक बड़ा टारगेट दिया। उसे कहा गया, ‘पंजाब जाओ, वहां तुम्हें एक माल की डिलीवरी मिलेगी। उसे सही जगह पहुंचाना है।’ इस काम के लिए उसे 10 लाख रुपए देने का वादा किया गया।

पंजाब में पहली बार हाथ में आया हैंडग्रेनेड विकास ने अपने दोस्तों और परिवार को बताया कि वह माता-पिता से मिलने गुजरात जा रहा है और पंजाब जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। हैंडलर्स ने उसे सख्त हिदायत दी थी कि वह पंजाब में किसी होटल में नहीं रुकेगा, बल्कि आवारा लोगों की तरह यहां-वहां घूमता रहेगा और फुटपाथ या किसी पार्क में रात बिताएगा, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
वह दिन भर अमृतसर में घूमता, स्वर्ण मंदिर जाता और दुकानदारों से अपना मोबाइल चार्ज कराकर वीडियो कॉल पर अगले निर्देशों का इंतजार करता। शाम ढलते ही वह शराब पीता और कहीं भी सो जाता। दो दिन ऐसे ही भटकने के बाद, उसे बताया गया कि एक लड़का काली शर्ट पहनकर आएगा और उसे काली पॉलीथिन में एक सामान देगा।
विकास बताई गई जगह पर एक बेंच पर इंतजार कर रहा था, तभी एक लड़का आया और उसे काली पॉलीथिन थमाकर चला गया। पॉलीथिन काफी भारी थी। विकास ने एक सुनसान जगह पर जाकर उसे खोला, तो उसके अंदर हैंडग्रेनेड था। यह देखकर वह एक पल के लिए डर गया, लेकिन फिर उसने हैंडलर को वीडियो कॉल किया।

‘बम थाने पर फेंकना है, तुम वीडियो बनाना’ दो दिन बाद, हैंडलर ने उसे बताया कि काम को अंजाम देने वाला दूसरा लड़का पहुंच चुका है। योजना यह थी कि एक स्थानीय लड़का मोटरसाइकिल से आएगा, विकास उसके साथ जाएगा, और वह लड़का पुलिस स्टेशन पर बम फेंकेगा, जबकि विकास इस पूरी घटना का वीडियो बनाएगा।
दोनों मोटरसाइकिल से थाने के सामने पहुंचे, लेकिन ऐन मौके पर बम फेंकने वाले लड़के की हिम्मत जवाब दे गई और उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया। दोनों वापस लौट आए। जब विकास ने यह बात हैंडलर को बताई, तो उसने कहा, ‘अच्छा हुआ वह कायर चला गया। इस मिशन को अब तुम ही अंजाम दोगे। हम तुम्हें रुपए भिजवा रहे हैं।’
विकास ने जांच एजेंसियों को बताया कि उसने बम फेंकने का इरादा बदल दिया। इसके बाद उसे हैंडग्रेनेड दूसरे लड़कों को देने के लिए कहा। मैंने जब उन लड़कों को हैंडग्रेनेड दिया तो उन्होंने इसे थाने के बाहर फेंका। विकास का कहना है कि जिस समय थाने पर हमला हुआ उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं था।

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