एक खूंखार नक्सली ने खुद उसी सिस्टम से मदद मांगी, जिसके खिलाफ वह सालों से हथियार उठाए हुए था. यह कहानी सिर्फ सरेंडर की नहीं है, बल्कि एक ऐसे भावनात्मक बदलाव की है, जिसने एक हिंसक रास्ते पर चल रहे व्यक्ति को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि यह घटना मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर है, और इसने नक्सल रणनीतियों पर नया असर डाला है. इसके पीछे चौंकाने वाली कहानी भी है. इसमें ऐसे किरदार हैं जिन पर भरोसा करते हुए नक्सलियों ने सरेंडर की राह चुनी.
दरअसल, बालाघाट में बीते कुछ समय में नक्सलियों के हौसले पस्त हुए हैं. इसका कारण कुछ और नहीं लेकिन सुरक्षा बलों की वो मेहनत, जिन्होंने सात-सात दिनों तक जंगलों की खाक छानी. नतीजतन 26 नक्सलियों ने सरेंडर की राह चुनी. किसी पहले एमपी में सुनीता फिर चार नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ और 11 नक्सलियों ने महाराष्ट्र जाकर सरेंडर किया. आखिर में एमपी में भी 10 नक्सलियों ने बालाघाट आकर सरेंडर किया. 7 दिसंबर को मुख्यमंत्री बालाघाट आए और नक्सलियों से हथियार लेकर उनके हाथ में संविधान की किताब थमाकर मुख्यधारा में शामिल करवाया. लेकिन ये सरेंडर इतना आसान नहीं था.
जितना सरेंडर आसान लग रहा उतना ही मुश्किल था
एमपी के इतिहास के सबसे बड़े नक्सल सरेंडर की बात होती है, तो सिर्फ इतना समझ आता ही नक्सलियों को एक बीट गार्ड गुलाब उइके ने आईजी के बंगले पहुंचाया और सरेंडर करवाया. कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. इसके पीछे के भी है, जानिए पूरा किस्सा…
कैंप आए और बोले- गुलाब को बुलाओ
10 नक्सलियों को सरेंडर करवाने वाले फारेस्ट गार्ड गुलाब उइके ने बताया कि नक्सली कैंप आते है और कहते है गुलाब को बुलाओ. उस वक्त वह खापा में थे, जानकारी मिलने के बाद वह कैंप पहुंचे. इसके बाद उनसे मुलाकात हुई. उन्होंने मांग की हम 10 नक्सली है और हमें छत्तीसगढ़ के रेंगाखार के थाने में पहुंचा दो. एक गाड़ी की व्यवस्था कर दो. इसके बाद उन्होंने कहा कि नहीं मैं दूसरे राज्य में नहीं पहुंचा सकता. उन्होंने कहा कि मैं बालाघाट या फिर मंडला में सरेंडर करवा दो.
कलेक्टर का वीडियो देख दूर हुई बेचैनी
सालों से जंगल में रह नक्सलियों में सरेंडर की इच्छा तो थी लेकिन एक बेचैनी भी थी. ऐसे में भरोसेमंद बीट गार्ड ने उन्हें कलेक्टर का वीडियो दिखाया. नक्सली कबीर ने 10 से 12 मिनट तक वीडियो देखा और सरेंडर करने की इच्छा जताई. फिर उन्होंने शनिवार को सरेंडर करने का दिन तय कर दिया. फिर उन्होंने सरेंडर कराने के वाले फोर्स के लोगों से संपर्क किया. फिर उन्होंने बोलेरो वाहन से 10 नक्सलियों बालाघाट में आईजी के बंगले पर ले गए.
पहले भी दे चुके राशन
फारेस्ट गार्ड गुलाब सिंह उइके बताते हैं कि पहले भी नक्सली उनसे टकराते थे. ऐसे में वह उनसे राशन के लिए मांग करते थे. फिर वह नक्सलियों को चावल, आटा, सब्जी सहित तमाम चीजें देते थे. ऐसे में वह नक्सलियों के भरोसेमंद भी थे. यहीं वजह थी की नक्सलियों ने गुलाब सिंह उइके को सरेंडर करने के लिए आमंत्रित किया.
ऐतिहासिक सरेंडर, जो साबित होगा आखिरी कील
बालाघाट में यहां एक साथ 10 इनामी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपने हथियार डाल दिए. इन सभी नक्सलियों पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में कुल मिलाकर 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनमें सुरेंद्र उर्फ कबीर, राकेश ओडी उर्फ मनीष, समर उर्फ समारू, सलीता उर्फ सावित्री, विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी, लाल सिंह मरावी, शिल्पा नुप्पो, जरीना उर्फ जोगी मुसाक, जयशील उर्फ ललीता और नवीन नुप्पो शामिल हैं. इनमें से कई लंबे समय से छत्तीसगढ़ के बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में सक्रिय थे.