Success Story. आज हम आपको एक ऐसे युवा की सफल कहानी बताने जा रहे हैं जो बाइक में ही घूम कर अपना बिजनेस करते हैं. इस बिजनेस से उन्हें बढ़िया मुनाफा हो जाता है. दरअसल, 20 वर्षीय गोरेलाल जो घर-घर जाकर महिलाओं के सिर के टूटे बाल खरीदते हैं और इसके बदले उन्हें घर-गृहस्थी का सामान देते हैं. इस बिजनेस से गोरेलाल को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है. वह हर दिन घूम-घूमकर 600 रुपए से लेकर 1000 रुपए की कमाई कर लेते हैं.
यूपी के कानपुर के रहने वाले 20 वर्षीय गोरेलाल बताते हैं कि मैंने पढ़ाई तो ज्यादा नहीं की. लेकिन इस धंधे से बहुत जल्द ही जुड़ गया. मैंने सिर्फ कक्षा छठवीं तक की पढ़ाई की है. इसके बाद मैं इस धंधे से जुड़ गया. मैंने सालों इस धंधे को सीखा. हालांकि , पिछले साल से मैंने पूरी तरह से खुद ही यह धंधा करना शुरू कर दिया.
गोरेलाल बताते हैं कि इस बिजनेस में मुझे फायदा है इसलिए सैकड़ों किलोमीटर बाईक से कहीं भी चला जाता हूं. जहां हमें महिलाओं के सिर के बाल मिलते हैं, वहीं हम डेरा डाल लेते हैं. कहने का मतलब है कि वहां हम किराए से कमरा लेकर रहने लगते हैं और महीनों तक वहां रहकर धंधा करते हैं. अभी हम छतरपुर जिले में डेरा डाले हुए हैं क्योंकि सर्दी की मौसम में यहां हमें महिलाओं के सिर के बाल हर दिन मिलते हैं.
यूपी से लेकर एमपी में तक घूमते हैं
गोरेलाल बताते हैं कि हम यूपी के जिलों से लेकर एमपी के सभी जिलों में घूमते हैं. जहां भी हमें बाल मिलते हैं वहां हम बाईक दौड़ा देते हैं. कानपुर से हम भोपाल भी बाईक से ही जा चुके हैं, वहां भी रहकर धंधा कर चुके हैं.
इस मौसम में मिलते हैं बाल
गोरेलाल बताते हैं कि महिलाओं के सिर के बाल सबसे ज्यादा सर्दी के मौसम में मिलते हैं. हालांकि, हल्की बारिश के मौसम में भी हमें बाल मिलते हैं. लेकिन गर्मी के मौसम में यह धंधा कम हो जाता है. गर्मी के मौसम में हमें टूटे बाल नहीं मिल पाते हैं.
4 हजार रुपए किलो खरीदते हैं
गोरेलाल बताते हैं कि हम यहां लोगों से ₹4000 किलो के भाव से टूटे बाल खरीदते हैं. हम अपने साथ बर्तन भी लिए रहते हैं क्योंकि महिलाएं ज्यादातर घर-गृहस्थी का सामान खरीदती हैं. जिस जिले से यह टूटे बाल खरीदते हैं वहीं यह बाल बेच भी लेते हैं इसलिए ज्यादा दूर तक ले जाने की झंझट भी नहीं रहती है.
ऐसे होता है मुनाफा
गोरे लाल बताते हैं कि हम टूटे हुए बाल खरीदते हैं और इसके बदले में महिलाओं को घर गृहस्थी का सामान देते हैं. हमारे पास बर्तन होते हैं यही बर्तन उन्हें बालों के बदले देते हैं. इसलिए हमें पैसे देने की जरूरत भी नहीं होती है. टूटे हुए बाल के बदले बर्तन देना यही हमारे मुनाफे का जुगाड़ है. इससे हमारे बर्तन भी बिक जाते हैं और बाल भी खरीद लेते हैं.
ऐसे आया आइडिया
गोरेलाल बताते हैं कि इस बिजनेस का आईडिया मुझे अपने परिवार के लोगों और रिश्तेदारों को देखकर आया था. ये बिजनेस रिश्तेदार और परिवार के लोग करते थे तो सोचा फायदा होता होगा इसलिए हम भी करने लगे.