चने की बुवाई में हो गई देरी? किसान भाई एक्सपर्ट का बताया ये तरीका अपनाएं, ढाई महीने में फसल तैयार

चने की बुवाई में हो गई देरी? किसान भाई एक्सपर्ट का बताया ये तरीका अपनाएं, ढाई महीने में फसल तैयार


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Agri Tips: रबी सीजन की बुवाई का समय निकल चुका है, लेकिन कई किसानों के खेत देर से खाली होने के कारण चने की बुवाई अटक गई है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सही तकनीक अपनाकर देर से बोई गई फसल भी समय पर तैयार हो सकती है और उत्पादन भी बढ़िया मिलेगा. जानें कैसे…

Agriculture Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाती है. इस बार भी जिले के ज्यादातर किसानों ने समय पर गेहूं और चने की बोनी कर ली. लेकिन, कपास जैसी लंबी अवधि वाली फसल देर से निकलने के कारण कई किसानों को बुवाई में देरी करनी पड़ी है. ऐसे किसान अब परेशान हैं कि देर से बुवाई करने पर उत्पादन कितना कम होगा या फसल कब तैयार होगी.

कृषि विभाग के अनुसार, खरगोन में करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई होती है. इनमें सबसे ज्यादा गेहूं और चना बोया जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक चने को बुवाई 10 नवंबर तक जो जानी चाहिए हैं. इसके बाद बुवाई पिछेती मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक बदलकर किसान दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक भी चना बो सकते हैं और फिर भी अच्छी उपज पा सकते हैं.

कम अवधि की किस्में चुनें
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि जिले में अक्सर कपास की तुड़ाई देर से पूरी होती है, जिसके कारण किसान चने की बोनी समय पर नहीं कर पाते. उन्होंने कहा कि जो किसान अभी चने की बुवाई करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले कम अवधि वाली उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. कम अवधि वाली किस्में 80 से 90 दिन में तैयार हो जाती हैं, जिससे किसान समय की कमी पूरी कर सकते हैं.

पलेवा देकर बुवाई न करें
डॉ. कुलमी ने बुवाई की तकनीक पर जोर देते हुए कहा कि देर से बुवाई करने वाले किसान पलेवा देकर बोनी बिल्कुल न करें. ऐसा करने से किसान 15 दिन और पीछे हो जाते हैं. उन्होंने समझाया कि पलेवा देने, खेत सूखने और फिर बोनी करने में बहुत समय लग जाता है. इसकी जगह किसान खेत को हल्की जुताई कर तैयार रखें और सूखे में ही बीज डाल दें. इसके बाद तुरंत एक सिंचाई कर दें. उन्होंने बताया कि यह तकनीक किसान की कम से कम 15 दिन की देरी बचा सकती है, क्योंकि सूखे में बोया बीज सिंचाई मिलते ही तेजी से अंकुरित हो जाता है. इससे पौधे की बढ़वार और फसल का पूरा चक्र तेजी से चलता है.

बीजोपचार करना जरूरी 
वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी कि देर से बुवाई करने पर बीज उपचार बेहद जरूरी है. चने के बीज को वीटा वेक्स पावर 3 ग्राम प्रति किलो बीज और ट्राईकोडर्मा 5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करने की सलाह दी गई है. इस उपचार से फसल को शुरुआती बीमारियों, मिट्टी में मौजूद फफूंद और कीटों से सुरक्षा मिलती है. बीज उपचार से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उत्पादन स्थिर रहता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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