मर्सिडीज ही नहीं, Ferrari तक को इंडिया में टक्कर देती थी ये मारुति कार, फिर क्यों मार्केट को कह दिया ‘अलविदा’ ?

मर्सिडीज ही नहीं, Ferrari तक को इंडिया में टक्कर देती थी ये मारुति कार, फिर क्यों मार्केट को कह दिया ‘अलविदा’ ?


नई दिल्ली. सभी लोग जानते हैं कि 2000 के दशक के अंत से लेकर 2010 के शुरुआती सालों तक लग्जरी सेडान का दौर था. यह सेडान कारों का गोल्डन एरा था, जिसमें ग्राहकों के पास प्रीमियम ऑप्शंस की भरमार थी, जैसे शेवरले क्रूज़, फोक्सवैगन जेट्टा, होंडा सिविक, स्कोडा लौरा और टोयोटा कोरोला एल्टिस. जनता ने इन सभी कारों को खूब पसंद किया और इनकी बिक्री भी शानदार रही. अगर आप एक प्राइस ब्रैकेट ऊपर जाते, तो आपको हुंडई सोनाटा, टोयोटा कैमरी, बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज, मर्सिडीज सी-क्लास या ऑडी ए3 मिल जाती. यह वह समय था जब आप 30-35 लाख में एक लग्जरी जर्मन सेडान खरीद सकते थे.

2011 में आई किशाजी
मारुति सुजुकी भी इस सेगमेंट में अपनी जगह बनाना चाहती थी. भारत की अग्रणी निर्माता कंपनी होने के नाते, मारुति ने कुछ नया करने का फैसला किया. मारुति ने 2011 में CBU रूट के जरिए किजाशी लॉन्च की, जो एक बड़ा कदम था. दिलचस्प बात यह है कि इसे सिर्फ 3 साल बाद बंद कर दिया गया. किजाशी ने एक समय 327 किमी/घंटा की लैंड-स्पीड रिकॉर्ड भी बनाई थी. आज हम समझने की कोशिश करेंगे कि किजाशी आखिर क्यों गायब हो गई.

क्यों गायब हो गई किजाशी?
यह जानकर हैरानी होगी कि पिछले दशक की सबसे खूबसूरत कारों में से एक मारुति थी. इसकी स्लिक बॉडी और 17 इंच के अलॉय व्हील्स इसे बेहद आकर्षक लुक देते हैं. किजाशी और मारुति की बाकी रेंज के बीच फर्क काफी ज्यादा था. उस समय अगर बैज न हो तो कोई पहचान नहीं सकता था कि यह मारुति है.

कैसी दिखती थी किजाशी?
पीछे की तरफ ड्यूल क्रोम एग्जॉस्ट टिप्स मिलती हैं और बूट लिड को स्पोर्टी लुक देने के लिए लिप स्पॉइलर जैसा डिजाइन किया गया है. गाड़ी के अनुपात ऐसे हैं कि आपको 2.7 मीटर का लंबा व्हीलबेस मिलता है, लेकिन यह अजीब नहीं लगता. 2010 के दशक की कारें अभी हैलोजन से एलईडी लाइट्स की ओर शिफ्ट नहीं हुई थीं, और किजाशी में भी यही देखने को मिलता है. इसमें SX4 से थोड़ी समानता भी दिखती है, लेकिन यह कोई निगेटिव पॉइंट नहीं है. इसमें कोई खास एस्थेटिक फीचर नहीं है, लेकिन इसका सिंपल और स्मूद डिजाइन इसे वह सोफिस्टिकेटेड लुक देता है, जो सेडान खरीदते समय लोग चाहते हैं.

दमदार रोज प्रेजेंस
यह स्पोर्टी और एलिगेंट का सही मिश्रण था, जिससे इसकी रोड प्रेजेंस काफी दमदार थी. SUV और हैचबैक की भीड़ में किजाशी अपनी खूबसूरती के कारण अलग नजर आती थी. उस दौर की ज्यादातर प्रीमियम सेडान बेहद खूबसूरत दिखती थीं. डिजाइन इंजीनियर्स को जर्मन और जापानी कारों से बेहतर डिजाइन देने के लिए चमत्कार करना पड़ता था, और वे काफी हद तक इसमें सफल भी रहे.

इंटीरियर
अगर अंदर जाएं, तो किजाशी अपनी उम्र दिखाने लगती है. इसमें 2010 के शुरुआती वर्षों की कारों जैसा ट्रेडिशनल स्पीडोमीटर, छोटा सा TFT ड्राइवर डिस्प्ले, रेडियो सिस्टम और ढेर सारे फिजिकल बटन मिलते हैं. फीचर लिस्ट भी ठीक-ठाक है, जिसमें 6 एयरबैग, पुश-बटन स्टार्ट, 10-वे पावर एडजस्ट, ड्राइवर सीट पर 3 मेमोरी सेटिंग्स, रियर आर्मरेस्ट और लेदर सीट्स शामिल हैं. इसमें सिर्फ एक ही ट्रिम ऑप्शन था, इसलिए ये सभी फीचर्स स्टैंडर्ड थे.

बेहतरीन बिल्ड क्वालिटी
खास बात यह है कि इसकी बिल्ड क्वालिटी बेहतरीन है, जो उस समय की अन्य मारुति कारों की तुलना में काफी बेहतर थी. ड्यूल-टोन इंटीरियर्स और सॉफ्ट-टच मटेरियल्स इसे प्रीमियम फील देते हैं, और भारी दरवाजे इसकी मजबूत बिल्ड क्वालिटी का संकेत हैं. केबिन भी काफी स्पेशियस है, जिसमें पीछे बैठने वालों के लिए पर्याप्त लेगरूम और हेडरूम मिलता है.

इंजन और पावर
किजाशी में 2.4L VVT पेट्रोल इंजन मिलता है, जो लगभग 180 हॉर्सपावर और 230 Nm टॉर्क जनरेट करता है. ये आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं, और चूंकि यह नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन है, इसलिए ड्राइविंग का मजा दोगुना हो जाता है. गियरबॉक्स ऑप्शन में 6-स्पीड मैनुअल और CVT शामिल थे. ग्लोबल वेरिएंट में AWD ऑप्शन भी था, लेकिन भारतीय बाजार के लिए यह प्रैक्टिकल नहीं था.



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