Bhopal News: मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा का दर्द अब पुरुषों के सीने पर भी सवार हो गया है. ‘भाई संस्था’ की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है. जनवरी से जुलाई 2025 तक प्रदेश भर से 8,796 पुरुषों ने विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना के खिलाफ मदद की गुहार लगाई. इनमें 172 मामले शारीरिक हिंसा के थे, जहां पत्नी या पार्टनर द्वारा मारपीट, कपड़े फाड़ना, घर से बेदखली, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं सामने आईं. विशेषज्ञों का कहना है कि समाज की पुरानी धारणा कि ”हिंसा सिर्फ महिलाओं का दर्द है”, अब टूट रही है, लेकिन पुरुषों के लिए न्याय का रास्ता अब भी कांटों भरा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं में ज्यादातर 35 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के पुरुष हैं, जबकि 25-35 वर्ष के युवा दूसरे नंबर पर हैं. कई मामलों में पुरुषों ने बताया कि उनकी पत्नी उन्हें बच्चों से दूर रखती हैं, झूठे केस की धमकी देती हैं और आर्थिक-मानसिक दबाव बनाती हैं. पिछले सात महीनों में 810 पुरुषों ने बच्चों के पालन-पोषण और उनसे मिलने नहीं देने को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई हैं. पुरुषों के लिए कार्यरत ‘भाई संस्था’ और ‘वॉच लीग’ ऐसी समस्याओं से गुजर रहे पुरुषों को काउंसलिंग, कानूनी सलाह और हेल्पलाइन सपोर्ट उपलब्ध करा रही हैं.
महिलाएं ही पीड़ित… ये धारणा गलत
‘भाई संस्था’ के ट्रेजरर नितिन तलवार कहते हैं, समाज में यह धारणा रही कि सिर्फ महिलाएं ही पीड़ित हो सकती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पुरुष भी घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और झूठे मामलों के डर में जी रहे हैं. इन मामलों में निरंतर बढ़ोतरी दिख रही है और हमें जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की जरूरत है.
प्रताड़ना के ऐसे मामले आते हैं सामने
- मामला: तलाक के बाद पत्नी द्वारा करोड़ों की मांग और फर्जी केस दर्ज कराने की धमकी. संस्था की मदद से अदालत ने पुरुष को राहत दी.
- मामला: नौकरीपेशा युवक से पत्नी द्वारा 25 लाख रुपये की मांग, मानसिक प्रताड़ना. कानूनी सहायता के बाद युवक को सुरक्षा और न्यायिक सहारा मिला.
- मामला: पत्नी द्वारा बार-बार पुलिस में शिकायतें और घर से निकालने की कोशिश. संस्था ने मध्यस्थता कराई और कानूनी बचाव उपलब्ध कराया.
मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत
‘वॉच लीग’ की प्रतिनिधि चन्दना अरोड़ा बताती हैं, “हमारे पास आने वाले पुरुष भावनात्मक रूप से चूर हो चुके होते हैं. समाज उन्हें अपनी कमजोरी बताने में संकोच कराता है, लेकिन प्रताड़ना जेंडर की मोहताज नहीं. पुरुषों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी है.”
पुरुष आयोग बनाने की मांग तेज
बढ़ते पुरुष प्रताड़ना के मामलों को देखते हुए पुरुष आयोग बनाने की मांग तेजी हो गई है. आपको जानकार हैरानी होगी कि डॉक्टर्स, आईटी प्रोफेशनल्स समेत एनआरआई भी ऐसे मामलों के शिकार हैं. घरेलू हिंसा को जेंडर-न्यूट्रल अपराध माना जाए, जिससे पुरुष भी न्याय प्राप्त कर सकें. समाज को यह समझने की जरूरत है कि दर्द किसी भी जेंडर का मोहताज नहीं होता.