Last Updated:
Nilambari Gehu Production in December: नीलांबरी गेहूं की खेती करने के लिए किसान को कुछ भी अलग से करने की जरूरत नहीं है केवल उसके पास पानी के संसाधन उपलब्ध होने चाहिए. क्योंकि यह चार सिंचाई में तैयार होती है और इसमें 18 कुंतल तक का उत्पादन मिल जाता है जबकि बाजार में इसके दाम 7000 से 8000 प्रति क्विंटल मिलते हैं.
गेहूं की बुवाई का सही समय: बुंदेलखंड में मक्का की खेती करने वाले किसान इस बार रबी सीजन की बुवाई करने में पीछे रह गए हैं, लेकिन किसानों के लिए परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. क्योंकि अनाज की कई तरह की वैरायटी होती है जो लेट भी बुआई कर दें तब भी वह अच्छा उत्पादन देती है. तो जो किसान बुवाई की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए आज हम गेहूं की ऐसी वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे बंपर उत्पादन तो मिलेगा ही लेकिन सामान्य गेहूं की तुलना में इसके दाम भी दोगुना से ढाई गुना अधिक मिलेंगे.
सागर में मल्टी लेयर कृषि तकनीक को ईजाद करने वाले किसान आकाश चौरसिया 36 तरह के देसी गेहूं की वैरायटी की खेती करते हैं. गेहूं की यह वैरायटी आकाश ने देश के अलग-अलग राज्यों से एकत्रित की है. इन्हीं में एक नीलांबरी गेहूं है, जो मूल रूप से पंजाब की किस्म है और इस गेहूं की स्किन हल्की नीली होती है, स्काई कलर के जैसी दिखाई देती है. इसलिए इसे नीलमबरी के नाम से जाना जाता है, यह देखने में जितनी खूबसूरत लगती है इसके गुण भी उतने ही अधिक फायदेमंद है.
किसान आकाश चौरसिया बताते हैं की इस गेहूं की खेती करने के लिए किसान को कुछ भी अलग से करने की जरूरत नहीं है केवल उसके पास पानी के संसाधन उपलब्ध होने चाहिए क्योंकि यह है चार सिंचाई में तैयार होती है और इसमें 18 कुंतल तक का उत्पादन मिल जाता है जबकि बाजार में इसके दाम 7000 से 8000 प्रति क्विंटल मिलते हैं.
किसान आकाश चौरसिया के मुताबिक 15 दिसंबर तक इस गेहूं की बुवाई करने सबसे अच्छा समय है और जिनके पास पर्याप्त पानी है ऐसी किसान बाद में भी बुवाई कर सकते हैं, तो सबसे पहले दो बार खेत की जुताई करनी है फिर 50 से 60 किलो प्रति एकड़ की दर से बुवाई करनी है. 20 दिन का गेहूं होने के बाद उर्वरक का छिड़काव करें और सिंचाई करते रहें अलग-अलग अवस्था में चार बार सिंचाई करनी होगी यह 120 दिन की किस्म है.
आकाश बताते हैं कि इस गेहूं में प्रोटीन अधिक पाया जाता है जिन लोगों को दाल खाने से परेशानी होती है एसिडिटी की समस्या होती है ऐसे लोग प्रोटीन के लिए इस गेहूं का उपयोग करते हैं यानी की जो प्रोटीन दाल और अंडा जैसी चीजों में पाया जाता है भारत की विलुप्तप्राय इस देसी प्रजाति में भी होता है जिसका नियमित सेवन करने से लाभ मिल सकता है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें