शादी से पहले खेतों में करती थी मजदूरी, आज 200 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, खुद भी करतीं लाखों का कारोबार

शादी से पहले खेतों में करती थी मजदूरी, आज 200 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, खुद भी करतीं लाखों का कारोबार


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Burhanpur Womens Success Story: महिलाओं को मौका मिले तो वो क्या कुछ नहीं कर सकती, इस बात को साबित कर दिखाया है आशा कैथवास. जहां पहले वह सिर्फ खेतों में काम किया करती थी, आज वो करीब 200 महिलाओं के रोजी रोटी का साधन बनी हैं.

मोहन ढाकले/बुरहानपुर: महिला है कुछ भी कर सकती है इस बात को मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में रहने वाली आशा कैथवास ने चरितार्थ कर दिखाया है. आशा का जीवन काफी ग़रीबी में कटा आशा खेत में मजदूरी करने के लिए जाती थी लेकिन जैसे ही आशा की शादी हुई उसके बाद उसके परिवार के लोगों ने भी उसे सहयोग किया. जिसके बाद महिला ने सबसे पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर केले के रेशे से प्रोडक्ट बनाना शुरू किया. जिसके बाद अब महिला गांव में नल जल की वसूली कर रही है तो वही रेस्टोरेंट भी चलाती हैं. जिससे इस महिला की आमदनी हर साल 2 लाख रुपए की हो रही है.

महिला का कहना है कि हमने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जुड़कर करीब 6 लाख रुपए का लोन भी प्राप्त किया है मेरे गांव और आसपास के गांव में करीब 20 समूह में 200 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. जो इस लोन लेकर अब बकरी पालन, सिलाई का काम केले के रेशे से प्रोडक्ट बनाने का काम, नल जल कर की वसूली सहित अन्य काम कर रही हैं जिससे महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है.

महिला ने दी जानकारी 
लोकल 18 की टीम ने जब महिला आशा विकास कैथवास से बात की तो उन्होंने बताया कि मैं गृहणी थी मेरे पास कोई काम नहीं था. मैं शादी से पहले खेतों में मजदूरी करने के लिए जाती थी लेकिन जब मेरा विकास से विवाह हुआ तो मैंने सोचा क्यों न विकास का हाथ बटाया जाए और आगे बढ़ा जाए. घर परिवार के लोग मना करते थे लेकिन जब विकास ने परिवार के लोगों को समझाया तो पूरे परिवार ने सहमति दी और मैं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिसके बाद मैंने लगातार काम किया. मुझे लोगों की ओर से अच्छा रिस्पांस मिलता गया. लोग मेरे केले के रेशे से बने प्रोडक्ट खरीदने लगे तो वहीं मैं नल जल योजना के तहत अब गांव में वसूली भी करती हूं. अन्य महिलाओं को लोन दिलाकर किसी को बकरी पालन तो किसी को सिलाई मशीन तो किसी को कई प्रकार की चीज खोलने के लिए लोन भी उपलब्ध कराया. आज हमारे गांव में 20 समूह संचालित होते हैं जिसमें 200 महिलाएं जुड़ी हुई है जो अब आत्मनिर्भर बन गई हैं इनको आप लखपति दीदी भी कह सकते हैं.

10 वर्षों से कर रही हूं काम 
मेरे द्वारा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर पिछले 10 वर्षों से काम किया जा रहा है मेरे द्वारा दीदी कैफे का भी संचालन किया जाता है. जो असीरगढ़ पर यह संचालित होता है. वहां पर लोग मेरे हाथ का बना हुआ भोजन भी खाना पसंद करते हैं. जिससे मुझे हर साल 2 से 3 लाख रुपए की कमाई हो जाती है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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