जंगल में बाघ गणना के लिए इस तरह कैमरे लगाए थे।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना रेंज से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के लिए कोर एरिया में लगाए गए 4 कैमरा ट्रैप (दो जोड़) चोर चुरा ले गए। हैरानी की बात यह है कि बदमाश अति सुरक्षित माने जाने वाले सुपलई और खामदा बीट में घुसकर क
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कैमरे चोरी होने की जानकारी 28 नवंबर को मिली, जब बीट गार्ड डेटा इकट्ठा करने पहुंचे। उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को बताने के साथ केसला थाने में लिखित शिकायत दी। शिकायत को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है। केसला थाना प्रभारी उमाशंकर यादव का कहना है कि शिकायत मिली है, कैमरे के बिल मंगवाए गए हैं, जांच के बाद केस दर्ज होगा।
जहां बाघ का शिकार हुआ, वहीं अब कैमरे चोरी चोरी की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। जिस रास्ते पर कैमरे चोरी हुए, उसी रास्ते पर बढ़-चापड़ा के पास तवा डैम के बेकवाटर में चार महीने पहले एक बाघ का शव मिला था, जिसका पंजा कटा हुआ था। उस घटना के शिकारियों को STSF (स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स) अब तक नहीं पकड़ पाई है। अब उसी संवेदनशील क्षेत्र से कैमरों का चोरी होना बताता है कि जंगल में शिकारियों और असामाजिक तत्वों का मूवमेंट लगातार बना हुआ है।
22 अगस्त को बाघ का शव पानी में मिला।
सोहागपुर में 2 कैमरे चोरी, तुरंत हुआ केस दर्ज एक तरफ चूरना में केस दर्ज नहीं हुआ, वहीं सोहागपुर सामान्य वन मंडल की महेंद्रवाड़ी बीट (RF-226) से भी दो कैमरे चोरी हुए। यहां 7 दिसंबर को चोरी का पता चला और रेंजर सुमित कुमार पांडे के निर्देश पर बीट गार्ड ने अगले ही दिन माखननगर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।
फील्ड डायरेक्टर बोलीं- चोरी से पता चलता है मूवमेंट मामले पर एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा का अजीब तर्क सामने आया है। उन्होंने कहा, “हम मानकर चलते हैं कि 5 फीसदी कैमरे चोरी होंगे या घूमेंगे। इससे हमें पता चलता है कि उस क्षेत्र में मनुष्य की गतिविधियां हो रही हैं। हम उस क्षेत्र को संवेदनशील मानकर वहां सुरक्षा बढ़ाते हैं।” उन्होंने बताया कि शिकार हुए बाघ के मामले की जांच एसटीएफ कर रही है।
क्यों अहम हैं ये कैमरे? अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के लिए 15 नवंबर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडल में करीब 600 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। इन्हें 25 दिन बाद निकाला जाना था, लेकिन एक हफ्ते के भीतर ही चोरों ने कोर एरिया में हाथ साफ कर दिया। कोर क्षेत्र वन्य प्राणियों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, जहां बिना अनुमति घुसना अपराध है, लेकिन यहां सुरक्षा के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं।