8 बार हारे, फिर भी नहीं मानी हार! आखिरकार मजदूर के बेटे ने पहन ही ली वर्दी, गांव में ढोल नगाड़ों से स्वागत

8 बार हारे, फिर भी नहीं मानी हार! आखिरकार मजदूर के बेटे ने पहन ही ली वर्दी, गांव में ढोल नगाड़ों से स्वागत


Last Updated:

Sagar News: सागर के देवेंद्र पटेल ने 8 साल की मेहनत, 8 बार की असफलता के बाद आर्मी में जगह बनाई. गांव लौटते ही ढोल-नगाड़ों से स्वागत हुआ. मजदूर पिता का बेटा अब प्रेरणा बन गया है.

अनुज गौतम, सागर: कहते हैं किसी काम को अगर सिद्दत से चाहे तो सारी कायनात उस काम को कराने में लग जाती है.  ऐसा ही कुछ हुआ सागर के सेमरा निवासी देवेंद्र पटेल के साथ क्योंकि उनका आर्मी में जाने का सपना था और इसके लिए 8 साल तक संघर्ष किया. मेहनत की तब जाकर वह अपने सपने को पूरा कर पाए, बार-बार असफल हो रहे देवेंद्र के सामने अपने मजबूर और मजदूर पिता का चेहरा सामने आ जाता था तब वह और अधिक मेहनत करके अपनी तैयारी शुरू करते थे फिर 8 साल बाद आठवे संघर्ष में अपना सपना पूरा किया.

सागर की मकरोनिया वार्ड नंबर 1 में रहने वाले देवेंद्र के पिता हरिशंकर पटेल सेटिंग लगाने का काम करते हैं और उनकी मां ग्रहणी हैं. देवेंद्र तीन भाई एक बहन हैं इसके बावजूद उसने आर्मी में जाने का रास्ता चुना, और अब वह अपनी मंजिल को पकड़ बेहद खुश हैं. सेलेक्शन होने के बाद देवेंद्र की 9 महीने की जबलपुर में ट्रेनिंग हुई. जब वह वर्दी पहनकर अपने गांव लौटा तो गांववालों ने ढोल नगाड़े बजाकर डीजे पर उसका जुलूस निकालकर शान से स्वागत किया फूल माला पहनाई और घर के लोग नाचते गाते हुए नजर आए.

24 वर्षीय देवेंद्र पटेल ने साल 2017-18 में इसकी तैयारी शुरू की थी, इसके बाद उन्होंने लगातार खुली भर्ती में अपनी किस्मत आजमाई लेकिन एक के बाद एक साथ बार उन्हें असफलता मिली हर बार उन्होंने अपनी कमियां देखकर उनको दूर करने की कोशिश की तब आठ बार में उन्हें टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा बनने का मौका मिला,

देवेंद्र पटेल बताते हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थे तब फिजिकल फिटनेस के हिसाब से अपने एक दो दोस्तों के साथ बटालियन के ग्राउंड में रनिंग करने के लिए जाती थी यहां कुछ फौजी भाई भी आते थे वह हम लोगों को रोज देखते थे एक दिन उन्होंने अपने पास बुलाया और हम लोगों का मकसद पूछा लेकिन हम लोगों ने कहा कि ऐसे ही रनिंग करते हैं तब उन्होंने बताया कि आर्मी की तैयारी करो तुम लोगों की रनिंग अच्छी है, इसके बाद इसकी तैयारी कहां होती है पता किया तो पटेल अकैडमी की जानकारी मिली जहां राहुल पटेल से मुलाकात हुई और उनकी ग्रुप को ज्वाइन किया तो यहां उन्होंने हमारी तैयारी करवाई सबसे पहले जबलपुर टी ए की भर्ती में गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली इसके बाद उत्तराखंड बिहार उड़ीसा शिवपुरी ग्वालियर छत्तीसगढ़ में गए और भर्ती में हिस्सा लिया लेकिन सात बार हमें असफलता मिली, नवंबर के महीने में साल 2024 में सागर महार रेजिमेंट में ही भारती का आयोजन किया गया था जिसमें हमारा सिलेक्शन हुआ.

About the Author

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

homemadhya-pradesh

8 बार हारे, फिर भी नहीं मानी हार! आखिरकार मजदूर के बेटे ने पहन ही ली वर्दी



Source link