Wheat Farming News: रबी सीजन में किसान गेहूं के बेहतर उत्पादन का सपना लेकर बुवाई करते हैं, लेकिन खेतों में पनपने वाले खरपतवार उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खरपतवार गेहूं का सबसे बड़ा दुश्मन है, जो फसल का 50 फीसदी तक उत्पादन घटा देता है. ऐसे में सही समय पर इसका नियंत्रण बेहद जरूरी है, तभी किसान ज्यादा पैदावार की उम्मीद कर सकते हैं.
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन के दौरान करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं, चना, मक्का जैसी फसलों की बुवाई होती है. इसमें अकेले करीब 2 लाख हेक्टेयर में किसान गेहूं की खेती करते हैं. इस समय किसान सिंचाई और शुरुआती देखरेख में व्यस्त हैं, लेकिन इसी दौर में खेतों में खरपतवार भी तेजी से फैल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह फसल से पोषक तत्व, नमी और धूप छीनकर उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है.
खरपतवार से क्या नुकसान है
खरगोन वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि गेहूं में खरपतवार एक ऐसी समस्या है, जो फसल के साथ ही उगने लगती है. ये जंगली पौधे मिट्टी से पोषक तत्व सोख लेते हैं, जिससे गेहूं की ग्रोथ रुक जाती है और पौधे कमजोर पड़ जाते हैं. उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि किसान अगर सही समय पर खरपतवार नियंत्रण की “क्रांतिक अवस्था” को पहचानकर दवाइयों का छिड़काव करें तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
खरपतवार नाशक दवाओं के नाम
विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की बुवाई के 30 से 35 दिन की अवस्था खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे उपयुक्त रहती है. बाजार में उपलब्ध उन्नत दवाइयां जैसे क्लोबेनफार्म 15% और मेटसल्फ्यूरॉन 1% (वेस्टा) को 400 ग्राम प्रति हेक्टेयर (या 160 ग्राम प्रति एकड़) की मात्रा में छिड़कना चाहिए. इस अवधि में खरपतवार का आकार छोटा होता है और दवा जल्दी असर दिखाती है.
कब नहीं करना चाहिए दवाओं का छिड़काव?
डॉ. कुलमी बताते हैं कि कई किसान जल्दबाजी में 20–25 दिन में ही स्प्रे कर देते हैं, जबकि कुछ किसान 40–45 दिन बाद छिड़काव करते हैं. दोनों ही स्थितियां गलत हैं. शुरुआती अवस्था में फसल और खरपतवार दोनों छोटे होते हैं, जिसकी वजह से दवा का प्रभाव ठीक से नहीं पड़ता. वहीं, अगर किसान 40 दिन के बाद दवा का उपयोग करते हैं तो यह और बड़ी गलती साबित हो सकती है. जबकि, 30 से 35 दिन की अवस्था खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के लिए सबसे बेहतर समय है.
देरी से दावा डालने के नुकसान?
क्योंकि इस समय गेहूं में बाली बनने की प्रक्रिया (इनीशिएशन स्टेज) शुरू हो जाती है. ऐसे समय में दवा का छिड़काव करने से बाली विकास रुक सकता है, जिससे उत्पादन न सिर्फ कम होगा बल्कि फसल भी देर से तैयार होगी. इससे किसान आर्थिक नुकसान झेलते हैं. वैज्ञानिकों ने किसानों को किसानों को सलाह दी है कि, सही समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से फसल को पूरा पोषण मिलता है, पौधे मजबूत बनते हैं और उत्पादन 20–30 फीसदी तक बढ़ सकता है.