पीएचई विभाग के कामों की समीक्षा करते सीएम डॉ. मोहन यादव।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के कामों का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गांव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।
बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रुपए का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया है।
वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएं 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर हैं।
सीएम ने बैठक में दिए ये निर्देश
- जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाएं।
- जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।
- जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।
- जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।
- 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें जल आपूर्ति की कार्य योजना बनाएं।
- पानी की आपूर्ति और उपलब्धि के अनुसार जल वितरण का समय निर्धारित करें, जिससे नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
जल जीवन मिशन – प्रगति विवरण
- अब तक 80 लाख से अधिक घरों तक जल पहुंचा।
- 21,552 ग्राम हर घर जल घोषित।
- 15,026 ग्राम हर घर जल प्रमाणित।
- गांवों की 100% geotagging पूर्ण।
- SVS (एकल नलजल योजना) की प्रगति 93% तक पहुंची।
- MVS (समूह नलजल योजना) के अंतर्गत 3,890 ग्रामों में जल आपूर्ति प्रारंभ।
समूह नलजल योजनाएं
- कुल 147 समूह नलजल योजनाएं। 60,786 करोड़ लागत।
- 46 योजनाएं पूर्ण, 92 प्रगति पर, 9 प्रारंभिक चरण में।
- 3,890 ग्रामों में समूह योजनाओं से नियमित जल आपूर्ति शुरू।
आगामी 3 वर्षों का विजन
- ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार तक नल-जल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना।
- वंचित एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को शीघ्रता से नल-जल कनेक्शन प्रदान करना।
- जल प्रदाय योजनाओं का नियमित संचालन तथा जल आपूर्ति को प्रमाणित और सुचारु बनाए रखना।
- निर्माण कार्यों में गुणवत्तापूर्ण सामग्री व मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
- सभी जल स्रोतों की सतत उपलब्धता और उनका संरक्षण व संवर्धन करना।
- भुगतान और संचालन-प्रबंधन में मोबाइल ऐप व सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली लागू करना।
- तकनीकी आवश्यकता के अनुसार विभाजन स्तरीय प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन केंद्र स्थापित करना।
- जल योजनाओं की ऊर्जा आवश्यकता हेतु सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना
- जल गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं को NABL मान्यता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना।
- नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल सुविधाओं का विस्तार करना।