पाला से चना, मसूर को बचाइए! लग गया उकठा रोग तो 100% तक तबाह हो जाएगी फसल, जानें लक्षण और उपाय

पाला से चना, मसूर को बचाइए! लग गया उकठा रोग तो 100% तक तबाह हो जाएगी फसल, जानें लक्षण और उपाय


Last Updated:

Agriculture TIps: कृषि अधिकारी संजय सिंह ने उकटा रोग से बचाने के लिए संक्रमित पौधों को खेत से बाहर निकालकर नष्ट करने की सलाह दी है. इसके अलावा प्रति लीटर पानी में तीन ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड मिलाकर छिड़काव करें, किसान कार्बोडाजिम 50 डब्ल्यूपी 0.2 फीसदी घोल को पौधें की जड़ों में डाल सकते हैं.

मध्य प्रदेश में ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. विंध्य क्षेत्र के तापमान में लगातार गिरावट किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. रबी सीजन में बोई गई चना और मसूर की फसल पर अब उकठा रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. खेतों में पौधे सूखने लगे हैं और कई जगहों पर पूरे के पूरे हिस्से प्रभावित हो गए हैं. इससे किसानों की पैदावार पर सीधा संकट मंडराने लगा है.

किसान सलाहकार अनुपम चतुर्वेदी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि क्षेत्र में इस साल बड़ी संख्या में किसानों ने चना बोया है, लेकिन लगातार बदलते मौसम ने फसलों में उकठा रोग का खतरा और बढ़ा दिया है. उन्होंने बताया कि यह रोग खास तौर पर दो प्रकार का होता है. सफेद गलन और काली गलन, जिसे आम भाषा में उकठा कहा जाता है. यह फफूंदजनित बीमारी मिट्टी और बीज दोनों से फैलती है और पौधे को किसी भी अवस्था में प्रभावित कर सकती है.

चतुर्वेदी ने बताया कि उकठा रोग का प्रकोप इतना गंभीर है कि शुरुआती अवस्था में यह छोटे हिस्से को प्रभावित करता है, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेता है. प्रभावित पौधों की पत्तियां धीरे धीरे पीली पड़कर सूखने लगती हैं और लास्ट में पूरा पौधा मुरझा जाता है. जड़ के पास चीरा लगाने पर काली संरचना दिखाई देती है, जो इस रोग का प्रमुख संकेत है.

अनुपम चतुर्वेदी ने बताया कि किसानों को बुवाई के समय ही कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई, बीजों का फंगी‌ साइड से उपचार, मिट्टी में गोबर खाद व जैविक उपचार, और फसल चक्र अपनाना बेहद जरूरी है. इसके अलावा चना बोते समय रेसिस्टेंट किस्मों का चयन करना चाहिए ताकि फसल रोगों से सुरक्षित रह सके.

रोग रोकथाम के लिए बुवाई से पहले बीजों में ट्राइकोडर्मा पाउडर या कार्बेन्डाजिम का उपयोग अवश्य करना चाहिए. वहीं यदि फसल में उकठा रोग के लक्षण दिखाई देने लगें, तो कार्बेन्डाजिम 50 WP का 0.2% घोल बनाकर पौधों की जड़ों में छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है.

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस खेत में पहले उकठा रोग लग चुका हो, वहां कुछ सालों तक अरहर या लगातार चना नहीं लगाना चाहिए. मिट्टी में मौजूद फफूंद कई साल तक सक्रिय रहता है और फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए ऐसे खेत में फसल परिवर्तन बेहद जरूरी है.

About the Author

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

homeagriculture

पाला से चना, मसूर को बचाइए! लग गया उकठा रोग तो 100% तक तबाह हो जाएगी फसल



Source link