सदन में नाम उछला तो LIVE गाकर सुनाया ‘जन गण मन’, आरिफ मसूद बोले- वंदे मातरम नहीं गाऊंगा, जिद न करें…

सदन में नाम उछला तो LIVE गाकर सुनाया ‘जन गण मन’, आरिफ मसूद बोले- वंदे मातरम नहीं गाऊंगा,  जिद न करें…


मनोज शर्मा/भोपाल. केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में भोपाल से कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद के नाम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वो वंदे मातरम नहीं गाते. इस पर न्यूज 18 इंडिया ने आरिफ़ मसूद से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने राष्य्रगान जन गण मन गाकर सुनाया. उन्होंने कहा कि वो राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सम्मान करते हैं मगर गा नहीं सकते.

उन्होंने कहा कि कुछ कारण रहा होगा तभी मैंने कहा कि मैं वंदे मातरम नहीं गा पाऊंगा. उसका जिक्र अमित शाह ने सदन में कर दिया. अगर वो इस बात का उल्लेख करते तो खुश होता और मैं धन्यवाद देता कि नौजवानों को राजगार, किसानों को फायदे की खेती, स्वास्थ्य की सेवायें कैसे बेहतर होंगी, बच्चियों के बलात्कार हो रहे हैं औऱ छह साल तीन की बच्चियों के साथ रेप हो रहा है. उस पर चर्चा होती तो अच्छा लगता, लेकिन ठीक है गृहमंत्री हैं मेरा नाम रख दिया.

जन गण मन… हमेशा गाता रहुंगा
उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश में नाम हो रहा है. ये चाहे नाम कहें या बदनाम कहें, ना मुझे इनके नाम की ज़रूरत है और ना ही बदनामी की. मुझे आवश्यकता है कि मालिक ठीक रहे औऱ मालिक नाराज ना हो. उन्होंने जन गण मन गाते हुये  कहा कि जन गण मन को मैनें हमेशा गाया है और पूरा गाया है. हमेशा गाता रहूंगा.

जो मुझे गद्दार कह रहे हैं वो खुद पूरा गाकर बता दें
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे, मातरम इन लोगों से गवा दीजिये या वो उस लेखक का नाम बता दें या इनके नेता पूरा गा दें. एक नेता का वीडिय़ो वायरल हुआ था वंदे मातरम पर, इसलिये वो इस बार नहीं बोले. बोलते तो फंस जाते, क्योंकि अभी तक याद नहीं किया होगा. जो मुझे गद्दार कह रहे हैं वो खुद पूरा गाकर बता दें. राष्ट्रगीत की तरह वंदे मातरम को स्वीकार करता हूं. आदर में कोई कमी नहीं होगी, लेकिन गाने की जरूरत नहीं है. ना गाया है ना गाऊंगा.

कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘मैं अपनी विधानसभा में लोगों को अच्छी नजर से देखता हूं जो वंदे मातरम गाते हैं, वो गाएं, सब लोग गाएं. मुझे कोई एतराज नहीं है, लेकिन मुझसे ज़िद ना की जाये, क्योंकि आर्टिकिल 25 और संविधान… ये कह दें कि इन्होंने आर्टिकल 25 समाप्त कर दिया. ये घोषणा करें कि बाबा साहेब का संविधान नहीं है देश में. फिर हम अपना फैसला करेंगे.

बोलने की आज़ादी बाबा साहेब ने दी, बीजेपी ने नहीं
उन्होंने कहा कि बोलने की आज़ादी बाबा साहेब ने दी है. बीजेपी ने नहीं दी. संविधान ने मुझे ये अधिकार दिया है. सब गाएं मैं सम्मान करूंगा. मुझसे ज़िद नहीं की जाये. देश का राष्ट्रगीत वंदे मातरम है. इससे मैं कहां मना कर रहा हूं.  मैं आदर भी करता हूं. जहां भी कांग्रेस के हर कार्यक्रम में वंदे मातरम होता है हम खड़े होते हैं.

गाएं या ना गाएं इसमें क्या बहस
उन्होंने कहा कि संगीत सुनना छोड़ दिया. वंदे मातरम उनसे सुनों जो मुझपर इल्ज़ाम लगाते हैं. उनसे पूरा सुन लो. आप संविधान पर बात करते नहीं हो. देश संविधान से चलेगा. वो लोग बात कर रहे हैं जो देश की आज़ादी में नहीं थे, जिन्होंने आज तक तिरंगा नहीं फहराया. वो वंदे मातरम करें. असल बात ये है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव है. लिखने वाले कौन थे मालूम हैं. पश्चिम बंगाल में किस तरह राजनीति ले जाना है ये उसका खेल है. सदन का समय और पैसा दोनों बर्बाद किया. वंदे मातरम गाने का बोला तो फिर हाथ जोड़ लिया.



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