फसल है या ATM! किसानों के लिए फायदे का सौदा है गाजर की खेती, कम समय में हो जाएंगे मालामाल

फसल है या ATM! किसानों के लिए फायदे का सौदा है गाजर की खेती, कम समय में हो जाएंगे मालामाल


Gajar Ki Kheti: सर्दियां आते ही घर-घर की रसोई में गाजर की धूम मच जाती है. कभी सलाद में, कभी सब्जी में, तो कभी हलवे में गाजर हर घर की पसंद बन जाती है. यही वजह है कि मार्केट में इसका दाम हमेशा बढ़ता-घटता रहता है, लेकिन एक बात तय है कि गाजर की मांग कभी कम नहीं होती. कई लोग इसे कच्चा खाना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह हेल्दी भी है. इसी लोकप्रियता के कारण गाजर की खेती किसानों के लिए बेहतरीन मुनाफे वाला विकल्प बन जाती है.

जय कृषि किसान क्लिनिक के सुनील पटेल बताते हैं कि सर्दियों में गाजर की खपत बहुत ज़्यादा होती है, लेकिन खेती बहुत कम किसान करते हैं. ऐसे में जो किसान इसे अपनाते हैं, उन्हें कम समय में अच्छा मुनाफा मिल जाता है. गाजर की खासियत यह है कि यह सिर्फ 90 दिनों में तैयार हो जाती है, यानी लगभग 3 महीने में खेत से पैसा निकलना शुरू हो सकता है.

कैसे होती है गाजर की खेती
गाजर ठंड के मौसम की फसल है. इसे लगाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से दिसंबर तक माना जाता है. इस समय तापमान कम रहता है, जिसके कारण जड़ें अच्छी तरह बनती हैं और गाजर लंबी व चमकीली निकलती हैं. अगर किसान देर से बुवाई करते हैं, तो गाजर का आकार छोटा रह जाता है और बाजार में उसकी कीमत भी कम मिलती है.

गाजर की बुवाई के लिए सबसे बेहतर मिट्टी
गाजर की फसल ढीली, रेतीली और भुरभुरी मिट्टी में बहुत अच्छी होती है. मिट्टी जितनी मुलायम होगी, गाजर उतनी लंबी और सीधी निकलेगी. भारी और कड़ी मिट्टी में लगाने से गाजर टेढ़ी-मेढ़ी बन जाती है. खेती शुरू करने से पहले मिट्टी को 2–3 बार JCB या हल से पलटकर मुलायम कर लें. बाजार में पूसा रूबी, पूसा केसरी, नंटी, हिसार गाजर जैसी कई किस्में उपलब्ध हैं. एक एकड़ जमीन के लिए लगभग 2.5–3 किलो बीज पर्याप्त रहता है. बीज बोने से पहले उन्हें पानी में भिगो दें. इससे अंकुरण तेज होता है और पौधों की संख्या भी अच्छी मिलती है.

गाजर की बुवाई का तरीका
गाजर की बुवाई कूंचों पर या सीधी कतारों में की जा सकती है. ध्यान रखें कि बीज अधिक गहराई में न जाए. सिर्फ 1 से 1.5 सेंटीमीटर गहराई पर्याप्त है. बीज बहुत पास-पास न डालें, वरना जड़ें दबकर छोटी बनती हैं. बुवाई के बाद हल्की मिट्टी या गोबर खाद से ढक दें और तुरंत पानी लगा दें. गाजर को ज़्यादा पानी पसंद नहीं होता, लेकिन मिट्टी नम रहनी चाहिए. बुवाई के बाद पहली सिंचाई ज़रूरी है. इसके बाद हर 7–8 दिन में हल्की सिंचाई करते रहें.

गाजर की खेती में निराई-गुड़ाई और खाद
खेत में खरपतवार न बढ़ने दें, क्योंकि यह जड़ों के विकास को रोकता है. पहले 25–30 दिनों के भीतर 2 बार निराई-गुड़ाई करना अच्छा रहता है. गाजर की फसल ज़्यादा खाद नहीं मांगती, लेकिन गोबर खाद इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. बुवाई से पहले 10–12 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद खेत में मिला दें. अगर DAP या NPK देना हो, तो हल्की मात्रा ही रखें. ज़्यादा रासायनिक खाद देने से गाजर में दरारें आ जाती हैं.

कम लागत में बढ़िया कमाई
गाजर की फसल 85 से 90 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है. जड़ें मोटी, चमकीली और मजबूत दिखें, तो समझिए फसल निकालने का समय आ गया है. गाजर निकालने के बाद उन्हें छांव में सुखाकर कट्टों में भरें. साफ-सुथरी गाजर बेचने पर बाजार में हमेशा ज़्यादा दाम मिलता है. एक एकड़ में किसान आसानी से 100–150 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं. सर्दियों में गाजर का भाव 15–30 रुपये प्रति किलो तक रहता है. इस हिसाब से किसान सिर्फ 3 महीने में 60–90 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं. अगर मंडी के बजाय सीधे सब्जी वालों या होटलों को बेचें, तो और भी ज़्यादा फायदा हो सकता है.



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