पुणे–भोपाल बस सफर बना मुसीबत, एक सीट पर 5–6 यात्री: RTO की कार्रवाई के बाद दूसरी स्लीपर में ठूंस-ठूंस कर बैठाया, इंदौर में हंगामे के बाद पुलिस बुलाई – Bhopal News

पुणे–भोपाल बस सफर बना मुसीबत, एक सीट पर 5–6 यात्री:  RTO की कार्रवाई के बाद दूसरी स्लीपर में ठूंस-ठूंस कर बैठाया, इंदौर में हंगामे के बाद पुलिस बुलाई – Bhopal News


पुणे से भोपाल आ रही हंस ट्रेवल्स की एसी स्लीपर बस में सफर कर रहे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि शिरडी के पास आरटीओ की कार्रवाई के बाद उन्हें जबरन दूसरी बस में बैठा दिया गया, जहां क्षमता से कहीं ज्यादा लोग बैठाए

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शिरडी के पास आरटीओ द्वारा बस रोकी गई, इसके बाद सभी को बस से उतरवा दिया गया।

शिरडी के पास रोकी गई बस

बस में सफर कर रही यात्री सुरभि शर्मा के अनुसार, पुणे से शाम करीब 7 बजे रवाना हुई यह बस सुबह लगभग 4 बजे शिरडी के पास आरटीओ द्वारा रोकी गई। इसके बाद सभी यात्रियों को बस से उतरवा दिया गया। बस को कहां ले जाया गया, इसकी कोई जानकारी यात्रियों को नहीं दी गई।

कुछ देर बाद हंस ट्रेवल्स की एक अन्य बस मौके पर लाई गई। यात्रियों का आरोप है कि पीछे की कई बसों के यात्रियों को उसी एक बस में जबरन बैठाया। इससे बस में अत्यधिक भीड़ हो गई और यात्रियों को असुविधाजनक हालात में सफर करना पड़ा।

यात्रियों का कहना है कि ड्राइवर और स्टाफ ने भरोसा दिलाया था कि 20 किलोमीटर बाद उन्हें दूसरी बस में शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ। सुबह 4 बजे से यात्री लगातार ओवरक्राउडेड बस में यात्रा करने को मजबूर हैं।

एक-एक सीट पर 5 से 6 यात्रियों को बैठकर यात्रा करनी पड़ी।

एक-एक सीट पर 5 से 6 यात्रियों को बैठकर यात्रा करनी पड़ी।

एक सीट पर 5–6 यात्री

यात्री सुरभि शर्मा ने बताया कि एसी स्लीपर बस होने के बावजूद हालात बेहद खराब हैं। एक सीट पर पांच से छह लोग बैठे हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। बस में करीब 30 से ज्यादा यात्री इसी तरह फंसे हुए हैं।

बस में करीब 30 से ज्यादा यात्री फंसे हुए हैं।

बस में करीब 30 से ज्यादा यात्री फंसे हुए हैं।

यात्रियों ने वीडियो शेयर किए

पीड़ित यात्रियों के पास बस के अंदर की भीड़भाड़, ड्राइवर से बातचीत और पूरी घटना से जुड़े वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। यात्रियों ने इन्हें साझा कर अपनी परेशानी सार्वजनिक की है।

फिलहाल बस इंदौर के बाहरी इलाके में है। यात्रियों का कहना है कि भोपाल पहुंचने में अभी भी करीब पांच घंटे और लग सकते हैं।

यात्री बोलीं- ऑफिस के बाहर खड़े रहे, कोई सुनने वाला नहीं हंस ट्रेवल्स की बस में फंसी महिला यात्री सुरभि शर्मा ने बताया कि इंदौर पहुंचने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई। बस से उतारकर सभी यात्रियों को हंस ट्रेवल्स के इंदौर ऑफिस ले जाया गया, जहां उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम रिफंड या किसी सीनियर अधिकारी से बात हो पाएगी। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट रही। सुरभि के मुताबिक, करीब एक घंटे तक सभी यात्रियों को ऑफिस के बाहर खड़ा रखा गया। वे लगातार रिफंड की मांग करते रहे, सीनियर से बात कराने को कहते रहे, लेकिन ऑफिस में बैठे कर्मचारी न तो कोई जवाब दे रहे थे और न ही किसी जिम्मेदार को बुलाया गया। कर्मचारी सामने बैठे-बैठे इधर-उधर देखते रहे, मानो यात्रियों की परेशानी से उनका कोई सरोकार ही न हो।

बहस से गाली-गलौज तक पहुंचा मामला सुरभि शर्मा का कहना है कि लंबे इंतजार और अनसुनी के बाद यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। पहले बहस हुई, फिर माहौल इतना बिगड़ा कि गाली-गलौज तक नौबत आ गई। इस पूरी बहस की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है, जबकि कुछ वीडियो भी बनाए गए हैं। सुरभि के अनुसार, जब यात्रियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की तो उल्टा उन्हें ही धमकाया जाने लगा कि गाली-गलौज के मामले में केस कर दिया जाएगा।

पुलिस बुलाई, तब मिला ₹400 का रिफंड स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को बुलाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हंस ट्रेवल्स की ओर से केवल इंदौर से भोपाल तक का रिफंड कराया गया। सुरभि शर्मा के मुताबिक, यह राशि सिर्फ ₹400 थी, जबकि पुणे से इंदौर तक यात्रियों ने जो परेशानी और अमानवीय सफर झेला, उसकी कोई भरपाई नहीं की गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सुरभि शर्मा ने भोपाल जाने का सफर आगे जारी नहीं रखा और उज्जैन जाने के लिए अपने परिचित को बुलाया। सुरभि का कहना है कि यह सिर्फ एक यात्री की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की पीड़ा है, जिन्हें एक निजी ट्रैवल कंपनी की लापरवाही ने सड़क पर खड़ा कर दिया।



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