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इंदौरः रणजीत हनुमान मंदिर से निकली बाबा रणजीत हनुमान की विशाल प्रभातफेरी ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया. कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों की संख्या में श्रद्धालू फेरी में पहुंचकर बाबा के दर्शन करने आए. 4 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरा होने में 7 घंटे का समय लगा, इस दौरान जय श्री राम और जय रणजीत के उद्घोष से पूरा इंदौर गूज उठा. भक्तों की संख्या को देखते हुए 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी इस दौरान तैनात किए गए थे.
भक्तों को आशीर्वाद देते निकले हनुमान
140 साल से निकल रही प्रभात फेरी में मानों सैलाब उमड़ पड़ा था, जिसमें करीब 6 से 7 लाख लोग शामिल हुए. मंदिर के पुजारी नीतेश व्यास ने बताया कि रंजीत अष्टमी के अवसर पर चार दिन का अनुष्ठान होता है जिसमें चौथे दिन बाबा हर साल इसी तरह भक्तों को आशीर्वाद देने निकलते हैं. स्वर्ण रथ में बैठे रणजीत हनुमान का जगह जगह स्वागत किया जाता है. इस फेरी में तीन झांकियां भी थी. एक में राम दरबार लगा है जिसमें भगवान भक्तों को आशीर्वाद देते हैं, दूसरी में माता अंजनी की गोद में हनुमान लला बैठे हैं, और तीसरी झांकी में भविष्य में बनने वाले रंजीत लोग का प्रेजेंटेशन रखा गया था. प्रभात फेरी द्रविड़ नगर से महू नाका, दशहरा मैदान और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए वापस मंदिर पर पहुंची.
राजा भी भगवान के दर्शन करके रण में जाते थे
रणजीत हनुमान की फेरी के पीछे बड़ी रोचक कहानी है कहा जाता है कि जब मां सीता का हरण करके रावण उन्हें ले गया था तब हनुमान जी माता सीता की खोज में निकले थे और जब उन्होंने माता सीता को खोज लिया था. उसके बाद सभी वानरों ने मिलकर भगवान हनुमान को उठाकर जुलूस निकाला था तब भगवान राम प्रसन्न हो गए थे और उनका एक नाम रणजीत रखा गया था.
मान्यता है कि रणजीत हनुमान के दर्शन करने के बाद किसी भी काम जीत सुनिश्चित होती है. होलकर साम्राज्य के दौरान जब भी राजा किसी युद्ध में जाते थे तो सबसे पहले भगवान रंजीत के आगे शीश झुकाते थे फिर रण में जाते थे, कहा जाता है कि इस वजह से उन्हें युद्ध में कभी हार नहीं मिली जीत के बाद भी वह भगवान को शुक्रिया अदा करते थे.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें