13 साल से सक्रिय नक्सली कबीर ने किया सरेंडर, किए कई खुलासे

13 साल से सक्रिय नक्सली कबीर ने किया सरेंडर, किए कई खुलासे


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Balaghat news: 6 दिसंबर की रात एमपी के सबसे बड़े नक्सल सरेंडर की रात थी. इसमें सबसे बड़ा और अहम नाम कबीर है, जिस पर कई निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों को भी बेरहमी से हत्या के आरोप है. इतना ही नहीं कबीर उन नक्सलियों में भी शामिल था, जिसने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की एक पीढ़ी को ही हमेशा के लिए खत्म कर दिया. ये खुलासे तब हो रहे है, जब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.

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बालाघाटः मध्य प्रदेश का बालाघाट करीब 35 सालों से लाल आतंक जद में था लेकिन बीते कुछ सालों में बदलती रणनीति और स्थानीय लोगों का सपोर्ट टूट गया. नतीजतन, लाल आतंक के ताबूत पर आखिरी कील लगने की महज औपचारिकता बची है. 6 दिसंबर की रात एमपी के सबसे बड़े नक्सल सरेंडर की रात थी. इसमें सबसे बड़ा और अहम नाम कबीर है, जिस पर कई निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों को भी बेरहमी से हत्या के आरोप है. इतना ही नहीं कबीर उन नक्सलियों में भी शामिल था, जिसने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की एक पीढ़ी को ही हमेशा के लिए खत्म कर दिया. ये खुलासे तब हो रहे है, जब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. जानिए उस नक्सली की कहानी, जो बालाघाट में 12 सालों से सक्रिय था.

12 साल से सक्रिय नक्सली ने किया सरेंडर

तारीख थी 25 मई 2013 थी, जब छत्तीसगढ़ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व परिवर्तन यात्रा में जुटा था. उनका काफिला बस्तर जिले के दरभा इलाके की झीरम घाटी से गुजर रहा था कि अचानक एक गाड़ी में ब्लास्ट होता है और सैकड़ों नक्सली लगातार फायरिंग करना शुरू कर देते है. घंटे भर फायरिंग चलती है और फिर सुरक्षाबलों की गोलियां खत्म हो जाती है. इसके बाद तमाम नेता सरेंडर करने के लिए आगे आते हैं. माओवादियों को तलाश थी बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा की. दरअसल, महेंद्र कर्मा ने ही सलवा जुडूम की स्थापना की थी.

ऐसे में महेंद्र कर्मा और नंद कुमार पटेल हमले में मुख्य निशाना थे. माओवादी महेंद्र कर्मा को घसीटते हुए जंगल की ओर ले जाते हैं और उनकी निर्मम हत्या करते हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनके शरीर पर 78 चाकू के घाव थे और कई गोलियां उन पर दागी गई. इस हमले में करीब 28 लोग मारे गए, जिसमें 12 कांग्रेस नेता, 8 सुरक्षाबलों के जवान और चार ग्रामीण मारे गए. इस हमले में करीब 2 सैंकड़ा माओवादी मौजूद थे. उन्हीं में से एक था सुरेंद्र उर्फ कबीर, जिसने 6 दिसंबर की रात सरेंडर किया था.

10 साल से बालाघाट में था सक्रिय

आपको बता दें कि वह झीरम घाटी हमले के बाद साल 2014-15 के दौरान ही बालाघाट आया था. तब एमएमसी जोन का गठन नहीं हुआ था. वह यहां पर कई दलम में काम कर चुका था. वहीं, साल 2021 में उसे केबी यानी कान्हा भोरमदेव डिवीजन का प्रमुख और एमएमसी जोन का सचिव था. वहीं, बताया जा  रहा है कि वह फिर से दलम के विस्तार के काम लगा था. 15 साल पहले खत्म हुए परसवाड़ा दलम को फिर से एक्टिव करने की तैयारी में था. लेकिन सुरक्षा बलों की नई नीतियों ने माओवादियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया.

कौन है कबीर

सुरेंद्र उर्फ कबीर का एक और नाम है सोमा सोडी. उसकी उम्र करीब 50 साल है. वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के गुल्लापल्ली का रहने वाला है. वह अपने साथ एके 47 जैसा आधुनिक हथियार रखता था. उसने एक हथियार और 100 गोलियों के साथ पुलिस के सामने सरेंडर किया. वह तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र) में मोस्ट वांटेड था. उसने 9 साथियों के साथ 6 दिसंबर की रात पुलिस के सामने सरेंडर किया.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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