अगर आप खेती करते हैं और चाहते हैं कि कम समय में आपकी जमीन से अच्छा पैसा निकलने लगे, तो ताइवान पिंक अमरूद इस वक्त किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह वही फल है, जिसने पारंपरिक खेती करने वाले कई किसानों की सोच बदल दी है. बड़े आकार, गुलाबी रंग और मीठे स्वाद वाला यह अमरूद आज बाजार में छाया हुआ है और किसानों की जेब भी भर रहा है.
ताइवान पिंक अमरूद की सबसे बड़ी खासियत इसका तेज़ी से फल देना है. आमतौर पर फलदार पेड़ों में सालों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस अमरूद का पौधा सिर्फ 6 महीने में फल देने की तैयारी कर लेता है. हालांकि एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पहले सीजन में आए फलों को तोड़ना नहीं चाहिए, ताकि पौधा मजबूत हो सके. असली कमाई अगले सीजन से शुरू होती है.
Local 18 से बातचीत में खेती विशेषज्ञ बी.डी. सनखेरे बताते हैं कि यह वैरायटी बीते 6-7 सालों में तेजी से लोकप्रिय हुई है. उनके मुताबिक, एक साल का होते ही यह पौधा शानदार उत्पादन देना शुरू कर देता है. पहले साल एक पौधे से करीब 10-15 किलो फल मिल जाता है. दूसरे और तीसरे साल यही आंकड़ा 50-70 किलो तक पहुंच जाता है. कई किसानों के पेड़ तो 80 से 100 किलो तक फल दे रहे हैं.
अब बात करते हैं दाम की. जहां आम अमरूद बाजार में 30-40 रुपये किलो बिकता है, वहीं ताइवान पिंक अमरूद 80 से 100 रुपये किलो तक आराम से बिक जाता है. वजह साफ है इसका साइज बड़ा होता है, वजन 250 ग्राम से लेकर 700-750 ग्राम तक पहुंच जाता है और रंग गुलाबी होने से यह ग्राहकों को तुरंत आकर्षित करता है.
खेती की प्लानिंग भी आसान है. अगर आप इसे 8×5 फीट की दूरी पर लगाते हैं, तो एक एकड़ में करीब 900 से 950 पौधे लगाए जा सकते हैं. कम जमीन में ज्यादा पौधे और ज्यादा उत्पादन यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. देखरेख भी ज्यादा मुश्किल नहीं है, यही कारण है कि किसान सोयाबीन, गेहूं और कपास जैसी फसलों से हटकर इस ओर आ रहे हैं.
मध्यप्रदेश के हरदा, खरगौन, धार, बड़वानी और बुरहानपुर जैसे इलाकों में कई किसान इसे अपनाकर शानदार मुनाफा कमा रहे हैं. बी.डी. सनखेरे बताते हैं कि कुछ किसानों ने पहले साल में ही 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ की कमाई कर ली है. जैसे-जैसे पौधे बड़े होते हैं, कमाई भी बढ़ती जाती है. दो से तीन साल में यही आमदनी 4–5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है.
अगर कोई किसान अभी दिसंबर के महीने में ताइवान पिंक अमरूद का पौधा लगाता है, तो अगले साल दिसंबर तक उसके पेड़ फल देने लगते हैं. इस फल की मांग शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में बनी रहती है. दिखने में सुंदर और स्वाद में लाजवाब होने की वजह से यह जल्दी बिक जाता है और किसानों को बेचने में कोई परेशानी नहीं होती.
आज के समय में किसान यह समझ चुके हैं कि अगर सही वैरायटी चुन ली जाए, तो थोड़ी जमीन भी बड़ा फायदा दे सकती है. ताइवान पिंक अमरूद इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है कम समय में फल, ज्यादा पैदावार, मजबूत बाजार और बेहतर दाम. यही वजह है कि यह अमरूद तेजी से किसानों की पसंदीदा फसल बनता जा रहा है.
अगर आप भी साल खत्म होने से पहले कोई फलदार पौधा लगाना चाहते हैं, तो ताइवान पिंक अमरूद एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है. मेहनत कम, जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा बस सही पौधा लगाइए और थोड़ा धैर्य रखिए, आपकी जमीन खुद गुलाबी अमरूदों से भर जाएगी.