कोरोना काल से शुरू हुआ ‘सादी रसोई’ का सफर, हजारों की भूख मिटाता भंडारा

कोरोना काल से शुरू हुआ ‘सादी रसोई’ का सफर, हजारों की भूख मिटाता भंडारा


सतना. मध्य प्रदेश के सतना शहर में अगर किसी सामाजिक पहल ने लगातार लोगों का मन जीता है, तो वह है सेमरिया चौक पर हर शनिवार लगने वाला भंडारा. तेज रफ्तार जिंदगी, बढ़ती महंगाई और रोजगार की अनिश्चितता के बीच यह भंडारा न सिर्फ भूख मिटाने का माध्यम है बल्कि इंसानियत और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण भी बन चुका है. दोपहर होते-होते यहां ऐसी भीड़ जुटती है कि मानो शहर खुद इस नेक काम का हिस्सा बनने चला आया हो. पिछले चार वर्षों से सेमरिया चौक पर हर शनिवार यह सेवा निर्बाध रूप से जारी है. आसपास के इलाकों के अलावा बस स्टैंड से आने-जाने वाले यात्रियों को भी इसकी जानकारी पहले से रहती है. दोपहर एक बजे से पहले ही लोग कतार में खड़े दिख जाते हैं. वालंटियर्स स्टॉल लगाते हैं और थोड़ी ही देर में भीड़ अपने आप जुटने लगती है. अनुमान के मुताबिक, हर शनिवार यहां कम से कम एक से डेढ़ हजार लोग भोजन ग्रहण करते हैं.

इस सेवा कार्य की शुरुआत कोरोना महामारी के बाद हुई, जब बड़ी संख्या में लोग भुखमरी और बेरोजगारी से जूझ रहे थे. लोकल 18 को जानकारी देते हुए रामा ग्रुप के कर्मचारी दीपू सिंह राजपूत बताते हैं कि उस दौर में लोगों की हालत देखकर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय गोयल ने भोजन वितरण शुरू करने का निर्णय लिया. शुरुआत में घर-घर जाकर बेसहारा लोगों तक खाना पहुंचाया गया. जैसे-जैसे काम बढ़ा, वैसे ही राम कुमार गोयल फाउंडेशन की नींव रखी गई और सादी रसोई के तहत हर शनिवार सामूहिक भंडारे की परंपरा शुरू हुई.

बदलता रहता है मेन्यू
उन्होंने बताया कि भंडारे में मेन्यू भी बदलता रहता है, कभी खिचड़ी, कभी पूड़ी-सब्जी तो कभी अन्य सादा लेकिन पौष्टिक भोजन. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग केवल संख्या नहीं बल्कि विश्वास भी जोड़ते चले गए. स्कूल-कॉलेज के छात्र, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, महिलाएं, बच्चे-बुजुर्ग हर वर्ग के लोग अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं.

बुज़ुर्गों के लिए टिफिन सेवा
दीपू सिंह ने आगे बताया कि सादी रसोई की पहल यहीं तक सीमित नहीं है, 60 वर्ष से अधिक उम्र के असहाय बुजुर्गों के लिए टिफिन सेवा भी चलाई जा रही है. ऐसे बुजुर्ग जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं या बेसहारा हैं, उनके घर तक भोजन पहुंचाया जाता है. यह पहल भंडारे को केवल भीड़ वाला आयोजन नहीं बल्कि सुनियोजित सामाजिक सेवा बनाती है.

भोजन की क्वालिटी और स्वाद दोनों अच्छा
हर शनिवार यहां भोजन करने आने वाले मजदूर मकसूदन कुशवाहा लोकल 18 को बताते हैं कि वह नियमित रूप से यहां आते हैं. यहां खाने की क्वालिटी और स्वाद दोनों अच्छा होता है. बस स्टैंड के पास होने के कारण दूरदराज से आने वाले यात्री भी वीकेंड पर इस लंच का लाभ ले पाते हैं. कुल मिलाकर सेमरिया चौक का यह भंडारा सतना में सेवा, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बन चुका है.



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